रिपोर्ट – त्रिपुरारी यादव
राजातालाब, वाराणसी। संघर्ष और एकता की जीत का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है! पिछले 44 दिनों से राजातालाब तहसील परिसर में गूंज रहा भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध का स्वर आखिरकार जीत के जश्न में बदल गया। न्यायिक तहसीलदार के खिलाफ धरने पर बैठे अधिवक्ताओं का लंबा इंतजार गुरुवार को उस वक्त खत्म हुआ, जब जिलाधिकारी ने उनकी मांग मानते हुए न्यायिक तहसीलदार महेश प्रताप सिंह का स्थानांतरण कर दिया। यह खबर मिलते ही पूरे तहसील परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई और वकीलों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस बड़ी जीत का जश्न मनाया।
यह लड़ाई न्याय के मंदिर में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ थी। संयुक्त सचिव (प्रशासन) राजकुमार यादव ने भावुक होकर बताया, “यह हम सभी अधिवक्ताओं के आत्मसम्मान और सच्चाई की जीत है। जिलाधिकारी ने हमारी शिकायतों का संज्ञान लिया और जो फैसला दिया है, हम उसका स्वागत करते हैं।” उन्होंने बताया कि न्यायिक तहसीलदार के खिलाफ भ्रष्टाचार और मनमानी को लेकर अधिवक्ता समाज पिछले 44 दिनों से कड़ाके की धूप और हर मुश्किल को सहते हुए लगातार धरना दे रहा था। इसकी शिकायत कई बार जिलाधिकारी से की गई थी।
गुरुवार को जैसे ही न्यायिक तहसीलदार के स्थानांतरण की खबर अधिवक्ताओं तक पहुंची, 44 दिनों का सारा संघर्ष और थकान जीत के उल्लास में बदल गया। माहौल ऐसा था मानो कोई बड़ा त्यौहार हो। वर्तमान अध्यक्ष चंद्रशेखर उपाध्याय, महामंत्री अमित कुमार सिंह पटेल, संयुक्त सचिव राजकुमार यादव और पूर्व अध्यक्ष सुनील सिंह, सर्वजीत भारद्वाज समेत तमाम वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और जीत की बधाई दी। उनके चेहरों पर 44 दिन के लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता की चमक साफ देखी जा सकती थी।
इस बड़ी लड़ाई में राजातालाब के वकीलों को अकेला नहीं छोड़ा गया। दी सेंट्रल बार एसोसिएशन, वाराणसी और दी बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं महामंत्री ने भी इस आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया, जिसने स्थानीय अधिवक्ताओं के मनोबल को और मजबूत किया। यह जीत सिर्फ एक अधिकारी के तबादले की नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि जब अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जाती है, तो देर से ही सही, लेकिन सुनवाई जरूर होती है।




