वाराणसी में व्यापारी से 3.52 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोपी सेल्स ऑफिसर अरविंद केशरी की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। जानें कूटरचना और फर्जी जीएसटी बिल से जुड़े इस बड़े घोटाले की पूरी सच्चाई।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में धोखाधड़ी और कूटरचना (Forgery) के एक बड़े मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। व्यापारी के करोड़ों रुपए हड़पने के आरोपी सेल्स ऑफिसर अरविंद केशरी को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा। फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) के न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया।

इस सनसनीखेज वाराणसी धोखाधड़ी मामला की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित व्यापारी नितिन मित्तल ने अपने फर्म के माल की सप्लाई और वसूली के लिए प्रयागराज निवासी अरविंद कुमार केशरी को नौकरी पर रखा था। आरोप है कि सेल्स ऑफिसर अरविंद ने चंद रुपयों के लालच में आकर मालिक के विश्वास का कत्ल किया और साढ़े तीन करोड़ से अधिक का गबन कर दिया।

अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और अभियोजन पक्ष के तर्कों के अनुसार, अरविंद केशरी ने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची। इस वाराणसी धोखाधड़ी मामला में आरोपी ने: विभिन्न दुकानदारों के नाम पर फर्जी जीएसटी नंबर (Fake GST Number) का इस्तेमाल कर बिल काटे। कम दाम में माल बेचकर मोटी रकम खुद हड़प ली। माल की सप्लाई के लिए कूटरचित (Forged) बिलों का सहारा लिया ताकि फर्म को इसकी भनक न लगे।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने चन्द्रकान्त गुप्ता, रंजीत सिंह और युवराज सिंह जैसे लोगों के साथ मिलकर स्वदेशी कोनिया, संजय जायसवाल ट्रेडिंग, मेसर्स बजाज नमकीन, सोनू किराना स्टोर और आर्मी कैन्टीन सतावन जैसी कई फर्मों को फर्जी बिलों पर माल बेचा। इस मिलीभगत से वादी नितिन मित्तल की फर्म को लगभग 3,52,63,000/- रुपए की भारी आर्थिक चपत लगी।

जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव, संदीप यादव और अभियोजन की ओर से एडीजीसी मनोज गुप्ता ने आरोपी की रिहाई का कड़ा विरोध किया। वकीलों ने तर्क दिया कि यह केवल एक साधारण चोरी नहीं, बल्कि कूटरचना और विश्वासघात का एक गंभीर आर्थिक अपराध है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि व्यापारी के साथ हुई इस धोखाधड़ी में आरोपी की भूमिका मुख्य है, इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

निष्कर्ष: वाराणसी में व्यापारिक धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं। इस वाराणसी धोखाधड़ी मामला में कोर्ट के सख्त फैसले ने साफ कर दिया है कि कूटरचना और गबन जैसे मामलों में आरोपियों को राहत मिलना मुश्किल है।

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