अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी और उनके सहयोगी अधिवक्ता शादाब अहमद तथा आशुतोष पाठक ने पक्ष रखा
वाराणसी: ज़मीन और परिवार का विवाद अक्सर बहुत दर्दनाक मोड़ ले लेता है, जिसका सीधा असर आम लोगों की ज़िंदगी पर पड़ता है। ऐसा ही एक मामला वाराणसी की अदालत में था, जहाँ धोखाधड़ी, मारपीट, जान से मारने की धमकी और सबसे ज़्यादा दुखद— बोई हुई फसल को जलाकर नष्ट करने के आरोप में फँसे एक दम्पति को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
क्या है पूरा मामला? एक गरीब महिला की ज़मीन की लड़ाई – यह मामला रोहनिया के केसरपुर की रहने वाली रज़िया देवी से जुड़ा है। रज़िया देवी एक बहुत गरीब महिला हैं और खेती ही उनका एकमात्र सहारा है। उनकी शिकायत के अनुसार, उनके पाटीदार विंध्याचल पटेल (विद्याचन्द) और उनकी पत्नी आशा देवी कथित तौर पर उनके नाम से फर्जी वसीयत बनवाकर उनकी ज़मीन हड़पना चाहते हैं।

इस ज़मीन विवाद को लेकर सिविल कोर्ट में पहले से ही मुकदमा चल रहा है। रज़िया देवी का आरोप है कि विद्याचन्द ने एसडीएम कोर्ट से फर्जी तरीके से स्टे (रोक) भी ले लिया था, जो 5 अप्रैल 2021 को समाप्त हो गया।
खेत में लगाई आग और हुई आर्थिक क्षति – स्टे ख़त्म होते ही, वादिनी (रज़िया देवी) के अनुसार, विंध्याचल और आशा देवी ने जबरदस्ती उनकी खड़ी गेहूं की फसल काटने की कोशिश की, जिसमें वे सफल नहीं हो पाए। ज़मीन पर कब्ज़ा करने में बार-बार नाकाम होने से क्षुब्ध होकर दम्पति और उनके परिवार के अन्य सदस्य रज़िया देवी को आए दिन गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने लगे।

सबसे गंभीर घटना 11 अप्रैल 2021 की रात को हुई। रज़िया देवी का आरोप है कि विंध्याचल, आशा देवी और उनके बच्चों ने षड्यंत्र रचकर, उनकी कटी हुई गेहूं की फसल के बोजों (गट्ठरों) में आग लगा दी। इस आगजनी से रज़िया देवी को आर्थिक और मानसिक रूप से भारी नुकसान हुआ।
दम्पति को मिली अग्रिम ज़मानत – इस गंभीर मामले में, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो (प्रथम) विकास श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी दम्पति— विंध्याचल पटेल और उनकी पत्नी आशा देवी को गिरफ्तारी से पहले ही ज़मानत (Anticipatory Bail) दे दी है।

कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती है, तो उन्हें 50-50 हज़ार रुपए की दो ज़मानतें एवं बंधपत्र (Bond) देने पर रिहा कर दिया जाए। यह अग्रिम ज़मानत दम्पति के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि वे फ़िलहाल पुलिस की गिरफ्तारी से बच गए हैं।
अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी और उनके सहयोगी अधिवक्ता शादाब अहमद तथा आशुतोष पाठक ने दम्पति का पक्ष मज़बूती से रखा।

मामले की जांच और सुनवाई आगे भी चलती रहेगी, लेकिन ज़मीन विवाद की इस आगजनी ने एक बार फिर दिखाया है कि संपत्ति के झगड़े किस तरह रिश्तों और शांति को जलाकर राख कर देते हैं।



