वाराणसी में महाशिवरात्रि पर बाबा भोलेनाथ की भव्य बारात निकली। 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों के साथ गूंजी काशी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धर्म की नगरी वाराणसी में श्रद्धा और आस्था का एक ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसे देख हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। इस खास दिन बाबा की नगरी पूरी तरह से ‘बम-बम’ के उद्घोष से गूंज उठी। काशी के कण-कण में शिव का वास महसूस हो रहा था और हर घर मानो बाबा का घर बन गया था।

शिव बारात में उमड़ा जनसैलाब – परम्परागत तरीके से निकली बाबा की बारात ने वाराणसी की सड़कों को श्रद्धालुओं से भर दिया। इस बारात की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 10 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों का उत्साह चरम पर था और हर तरफ बस ‘हर-हर महादेव’ की गूंज सुनाई दे रही थी।

इस बारात की कुछ खास बातें :- विदेशी पर्यटकों का आकर्षण: बाबा की नगरी में केवल देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। वे भी स्थानीय लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर महादेव के जयकारे लगा रहे थे। नन्हे कलाकारों की प्रस्तुति: बारात में छोटे-छोटे कलाकारों ने भगवान शिव और उनके गणों के विभिन्न स्वरूप धारण किए थे, जो सभी के आकर्षण का केंद्र रहे। भव्य झांकियां: कई छोटी और बड़ी झांकियों ने काशी की सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत प्रदर्शन किया।

काशी के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान – वाराणसी में महाशिवरात्रि के पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। शहर की हर गली, चौराहा और मंदिर भक्तों की भीड़ से सराबोर था। श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ के प्रति अपनी अटूट भक्ति प्रदर्शित करने के लिए विशेष अनुष्ठान किए। काशी के प्रमुख मंदिरों में शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया गया। मान्यता है कि इस दिन महादेव की नगरी में किया गया जलाभिषेक अनंत फलदायी होता है। मंदिरों में आयोजित विशेष पूजा-अर्चना में हिस्सा लेने के लिए लोग घंटों कतारों में खड़े रहे।

धार्मिक और सामाजिक एकता का प्रतीक महाशिवरात्रि का यह पर्व वाराणसी के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। यह दिन लोगों को आपस में जोड़ता है और सामूहिक भक्ति का अहसास कराता है।

“काशी की गलियों में गूंजते ‘बम बम भोले’ के जयकारे न केवल आस्था के प्रतीक हैं, बल्कि ये यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को भी दुनिया के सामने मजबूती से रखते हैं।”

महाशिवरात्रि की इस भव्यता और श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि वाराणसी ही महादेव की असली नगरी है। यहाँ की फिजाओं में बिखरी भक्ति की खुशबू हर किसी को शिवमय कर देती है।

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