यहाँ आकाश, मोनू और सुनील सिंह नाम के व्यक्ति सक्रिय हैं, जो रोजाना लाखों रुपये का जुआ खिलवाते हैं।

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में इन दिनों अपराध का एक नया चेहरा सामने आ रहा है। वाराणसी में जुआ और सट्टा जैसी अनैतिक गतिविधियां शहर के माथे पर कलंक लगा रही हैं। पुलिस कमिश्नरेट द्वारा अपराध और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए विशेष तौर पर SOG-2 का गठन तो किया गया, लेकिन धरातल पर इसके परिणाम सिफर नजर आ रहे हैं।

रोहनिया बना जुआरियों का सुरक्षित अड्डा – शहर के कई इलाकों में आज भी बेरोकटोक बड़े पैमाने पर जुए का खेल संचालित हो रहा है। सबसे चौंकाने वाली स्थिति रोहनिया थाना क्षेत्र के फरीदपुर और केशरीपुर इलाकों की है। स्थानीय सूत्रों और आरोपों के मुताबिक, यहाँ आकाश, मोनू और सुनील सिंह नाम के व्यक्ति सक्रिय हैं, जो रोजाना लाखों रुपये का जुआ खिलवाते हैं। इन ठिकानों पर न सिर्फ जुआरियों की भीड़ जुटती है, बल्कि “ऑन डिमांड” नशीले पदार्थों और खान-पान के सामान की होम डिलीवरी तक की जाती है। यह स्थिति दर्शाती है कि वाराणसी में जुआ और सट्टा का नेटवर्क कितना गहरा और संगठित हो चुका है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पुलिस की चुप्पी हाल ही में रोहनिया क्षेत्र का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें खुलेआम जुआ होते देखा जा सकता है। इसके बावजूद, स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बड़ी बात: करीब तीन महीने पहले जब एक स्थानीय व्यक्ति ने जुए की सूचना पुलिस को देने की कोशिश की, तो आरोपी आकाश और उसके साथियों ने उस व्यक्ति के साथ मारपीट की। यह घटना साबित करती है कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है।

वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने जुआ, सट्टा और अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिए SOG-2 को जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन जनता अब यह पूछ रही है कि : जब हर गली-मोहल्ले में जुए के अड्डे जगमगा रहे हैं, तो SOG-2 की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या स्थानीय पुलिस की “मौन सहमति” इस अवैध धंधे को फलने-फूलने में मदद कर रही है? वाराणसी में जुआ और सट्टा के इन बड़े खिलाड़ियों पर हाथ डालने से पुलिस क्यों कतरा रही है?

जमीनी हकीकत: हर इलाके में पसरा जाल स्थानीय सूत्रों का कहना है कि वाराणसी का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा हो जहां सट्टे की पर्चियां न कटती हों या जुए की फड़ न सजती हो। पॉश इलाकों से लेकर तंग गलियों तक, यह अवैध कारोबार युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। पुलिस कमिश्नर को इस मामले में कड़ा रुख अपनाना होगा। केवल टीम बनाने से अपराध कम नहीं होते, बल्कि जमीनी स्तर पर अपराधियों में कानून का डर पैदा करना जरूरी है। अगर जल्द ही वाराणसी में जुआ और सट्टा के इन अड्डों पर बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो शहर की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

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