वाराणसी: प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए प्रशासन अब और भी सख्त हो गया है। इसी सख्ती का नतीजा रविवार को वाराणसी में देखने को मिला, जब एक “मुन्ना भाई” दूसरे के नाम पर परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह घटना हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज, मैदागिन में हुई, जिसने परीक्षा माफिया के नए पैंतरों को उजागर किया है।
मामला आया सामने, दो अलग-अलग नामों का खेल – कोतवाली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान नीकलेश कुमार (कौशांबी निवासी) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, नीकलेश 7 सितंबर को PET (प्रारंभिक अर्हता परीक्षा) का एग्जाम देने के लिए “निकलेश” के नाम से परीक्षा केंद्र पर पहुंचा था।

अधिकारियों को जब उस पर शक हुआ, तो उन्होंने उसकी गहन जांच की। जांच में पाया गया कि आरोपी ने अपने असली नाम “नीकलेश” में मामूली बदलाव करके “निकलेश” नाम से दो अलग-अलग फॉर्म भरे थे, ताकि वह दो बार परीक्षा में शामिल हो सके।
एक दिन पहले भी दिया था एग्जाम, लेकिन बच निकला – पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी ने बताया कि इससे एक दिन पहले, यानी 6 सितंबर को, उसने वाराणसी के ही जेपी मेहता इंटर कॉलेज में “निकलेश” के नाम से परीक्षा दी थी, लेकिन उस दिन उसे कोई पकड़ नहीं पाया।
यह घटना दर्शाती है कि परीक्षा माफिया अब कितने शातिर हो गए हैं और कैसे वे मामूली बदलावों के जरिए सिस्टम को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस ने बरामद किए फर्जी दस्तावेज, केस दर्ज – पुलिस ने आरोपी के पास से दो आधार कार्ड, एक निर्वाचन कार्ड और दो प्रवेश पत्र बरामद किए हैं, जिससे उसके फर्जीवाड़े का पूरा जाल सामने आ गया। केंद्र प्रशासन ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी।
थाना कोतवाली प्रभारी दया शंकर सिंह ने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन को इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए और भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।




