कुंडों को बचाने के लिए बन रहे हैं कृत्रिम तालाब

वाराणसी। आस्था और पर्यावरण के बीच संतुलन साधने की दिशा में वाराणसी नगर निगम ने एक सराहनीय कदम उठाया है। इस वर्ष दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन से शहर के ऐतिहासिक कुंडों और तालाबों को बचाने के लिए एक विशेष ‘ग्रीन प्लान’ तैयार किया गया है। इस योजना के तहत, पारंपरिक जलाशयों में विसर्जन पर रोक लगाते हुए शहर में कई स्थानों पर अस्थायी तालाबों का निर्माण किया जा रहा है, ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी सुरक्षित रहे और पर्यावरण को भी कोई हानि न पहुंचे।

इस अभिनव पहल की पहली झलक शंकुलधारा कुंड के पास देखने को मिली है, जहाँ पहला अस्थायी तालाब बनकर लगभग तैयार हो चुका है। यहीं पर दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न कराया जाएगा। नगर निगम का यह कदम न केवल कुंडों को प्रदूषण से बचाएगा, बल्कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में भी मील का पत्थर साबित होगा।

नगर आयुक्त और महापौर ने की जन-सहयोग की अपील नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने 28 अगस्त को शहरवासियों से इस मुहिम में जुड़ने का आह्वान किया था। उन्होंने काशी की धरोहर को बचाने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील करते हुए नागरिकों से विसर्जन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों के सुझाव मांगे थे। इस अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली और अब तक 9 जागरूक नागरिकों ने अपने बहुमूल्य सुझाव नगर निगम को भेजे हैं।

महापौर अशोक कुमार तिवारी ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा, “काशी के प्राचीन कुंड हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान हैं। इनमें प्रतिमाओं के विसर्जन से न केवल गंदगी फैलती है, बल्कि जलीय जीवों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो जाता है। हमारी सभी से अपील है कि अपनी धरोहरों को बचाने के लिए कृत्रिम तालाबों में ही विसर्जन करें।”

नागरिकों ने सुझाए कई वैकल्पिक स्थल नगर निगम की अपील पर नागरिकों ने उत्साह दिखाते हुए कई सुझाव दिए हैं, जो इस प्रकार हैं : –

  • विद्यानंद शर्मा ने सगरा तालाब (माधोपुरा) का सुझाव दिया है।
  • ईशान मेहरोत्रा ने नुआव पोखरा को एक विकल्प बताया है।
  • उमेश मौर्या ने बेनियाबाग तालाब का नाम सुझाया है।
  • मनीष गुप्ता ने मोती झील (महमूरगंज) को उपयुक्त माना है।
  • सत्यम सिंह ने पश्चिम बंगाल की तर्ज पर गंगा में क्रेन से विसर्जन कर प्रतिमा को पुनः बाहर निकालने की व्यवस्था का सुझाव दिया।
  • धर्मेंद्र सिंह टिंकू ने दुर्गाकुंड और कुरुक्षेत्र तालाब को विकल्प के तौर पर पेश किया।
  • अजय सिंह ने कमौली तालाब का सुझाव दिया।
  • हरीश शर्मा ने गंगा पार एक अस्थायी कुंड बनाने का प्रस्ताव रखा है।

आप भी बनें इस मुहिम का हिस्सा नगर निगम ने इस ‘ग्रीन प्लान’ को सफल बनाने के लिए नागरिकों, पूजा समितियों और जनप्रतिनिधियों से व्यापक सहयोग की अपील की है। यदि आपके क्षेत्र में कोई ऐसा स्थान है जो अस्थायी विसर्जन कुंड के लिए उपयुक्त हो, तो आप भी अपना सुझाव दे सकते हैं।

इसके लिए आपको स्थल का नाम, उसकी जीपीएस लोकेशन और एक फोटो नगर निगम के व्हाट्सएप नंबर 8601872688 पर भेजना होगा।

यह ‘ग्रीन प्लान’ परंपरा और पर्यावरण के सामंजस्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। नगर निगम का मानना है कि जन-भागीदारी से न केवल हमारे ऐतिहासिक जलाशय संरक्षित होंगे, बल्कि काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं भी और अधिक गरिमा के साथ सुरक्षित रहेंगी। आइए, हम सब मिलकर इस पहल को सफल बनाएं और अपनी काशी को स्वच्छ और सुंदर रखने में योगदान दें।

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