वाराणसी। समाजसेवा और व्यापार जगत में चार दशकों से अपनी प्रतिष्ठा बनाने वाले एक वरिष्ठ नागरिक को जब अपने ही सम्मान और अस्तित्व के लिए लड़ना पड़े, तो यह समाज के लिए एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। कुछ ऐसी ही पीड़ा लेकर वाराणसी के जाने-माने समाजसेवी और व्यापारी नेता विवेक कुमार गुप्ता मीडिया के सामने आए। काशी पत्रकार संघ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान उनका दर्द छलक उठा, जब उन्होंने विगत 21 अगस्त, 2025 को वाराणसी कचहरी में अपने साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का वृतांत सुनाया।

“मैं वकील नहीं, एक सामान्य नागरिक हूँ” – विवेक कुमार गुप्ता ने भारी मन से बताया, “मेरा पूरा जीवन गरीबों, असहायों और व्यापारियों की सेवा में बीता है। मुझ पर आज तक भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा। उस दिन मैं किसी पेशेवर हैसियत से नहीं, बल्कि अपनी पैतृक जमीन के एक पुराने मुकदमे के सिलसिले में एक आम नागरिक की तरह कचहरी गया था।”
उन्होंने बताया कि जब वे अपना काम निपटा कर लौट रहे थे, तभी कुछ विपक्षी वकीलों ने उन्हें घेर लिया। उन पर वकील होने का झूठा आरोप लगाते हुए प्रैक्टिस का सर्टिफिकेट दिखाने का दबाव बनाया गया। श्री गुप्ता ने उन्हें बार-बार समझाया कि वे वकील नहीं, बल्कि एक व्यापारी और समाजसेवी हैं और अपना विजिटिंग कार्ड भी दिखाया। इस बीच, उनके एक मित्र अधिवक्ता एस.आर. शेख ने भी हस्तक्षेप करते हुए उन लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी एक न सुनी गई।
वरिष्ठ नागरिक के साथ अपराधियों जैसा सलूक – विवेक गुप्ता के अनुसार, इसके बाद जो हुआ वह किसी भयावह सपने से कम नहीं था। उन्हें जबरन खींचकर बनारस बार में ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया, “वहाँ मौजूद लोगों, जिनमें दो महिला वकील भी शामिल थीं, ने बिना किसी कारण के मुझे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। मेरे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया, मुझ पर चीखा-चिल्लाया गया, गालियाँ दी गईं और मेरा मोबाइल फोन तक छीन लिया गया।”
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैंने अपनी 40 वर्षों की सामाजिक प्रतिष्ठा की दुहाई दी, यह भी बताया कि मैं 60 वर्ष का एक वरिष्ठ नागरिक हूँ, लेकिन उन्होंने मेरा सिर्फ उपहास उड़ाया।”
“यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था” – विवेक गुप्ता ने इस पूरी घटना को अपनी छवि धूमिल करने के लिए एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा, “मेरे पास वकालत का कोई प्रमाण नहीं था, फिर भी मुझे बिना किसी अधिकार के अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। मुझे एक अपराधी की तरह कैंट थाने ले जाया गया। इतना ही नहीं, मेरी वीडियो बनाकर वायरल की गई और मीडिया में झूठी खबरें छपवाकर मेरी वर्षों की कमाई इज्जत को मिट्टी में मिलाने की कोशिश की गई।”
न्याय के लिए लड़ाई की घोषणा – इस घटना से आहत व्यापारी नेता ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन सभी वकीलों, बनारस बार के पदाधिकारियों और उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने उन्हें घेरा, धमकाया, उनका मानसिक उत्पीड़न किया और उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया।
अंत में उन्होंने कहा, “यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि हर उस आम नागरिक की है, जिसे न्याय के लिए कचहरी आना पड़ता है। मैं इस अन्याय के खिलाफ तब तक चुप नहीं बैठूंगा, जब तक मुझे और मेरे सम्मान को न्याय नहीं मिल जाता। मेरा संघर्ष जनहित और व्यापारी हित में हमेशा की तरह जारी रहेगा।”
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