वाराणसी। उत्तर प्रदेश में जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आम जनता को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्धता जताते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके मातहतों का रवैया मनमाना और असंवेदनशील होता जा रहा है। आम नागरिकों की तो बात ही क्या, यहां तो न्याय दिलाने वाले अधिवक्ता भी सुरक्षित नहीं हैं। आए दिन पुलिस और वकीलों के बीच झड़प और मारपीट की खबरें सामने आती रहती हैं।

ताजा मामला वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र का है, जहां शनिवार को माहौल उस समय गरमा गया जब एक क्राइम इंस्पेक्टर ने एक अधिवक्ता पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका इलाज बीएचयू ट्रामा सेंटर में चल रहा है। इस घटना की जानकारी मिलते ही सैकड़ों की संख्या में अधिवक्तागण थाने पर पहुंच गए और पुलिस के इस बर्बर रवैये का विरोध किया।

आखिर हुआ क्या? – घायल अधिवक्ता की पत्नी शारदा सिंह ने भेलूपुर थाने में इस घटना को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 13 सितंबर, 2025 की रात करीब 8 बजे, वे अपने पति, अधिवक्ता शिवा प्रताप सिंह के साथ लक्ष्मी जी के दर्शन करके घर लौट रही थीं। जब वे रथयात्रा चौराहे पर पहुंचे, तो भेलूपुर थाने की पुलिस ने उन्हें ‘नो एंट्री’ बताकर रोक दिया।

अधिवक्ता शिवा प्रताप सिंह ने पुलिस से गुजारिश करते हुए कहा कि उनका घर बिल्कुल पास में ही है और वे पेशे से अधिवक्ता हैं। अधिवक्ता का नाम सुनते ही वहां मौजूद कन्हैया नामक एक दरोगा भड़क गया। उसने आपा खो दिया और गुस्से में कहने लगा, “अधिवक्ता जीने लायक नहीं होते, ये कीड़े होते हैं, मारो साले को।” इतना कहते ही उस दरोगा ने किसी लोहे की वस्तु से अधिवक्ता पर हमला कर दिया।

हमला इतना जोरदार था कि अधिवक्ता के हेलमेट का शीशा और ऊपरी हिस्सा टूट गया और उनकी आंख के ऊपर गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत बीएचयू ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

अधिवक्ता की पत्नी ने अपनी शिकायत में मांग की है कि इस घटना पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करके आवश्यक कार्रवाई की जाए। फिलहाल, पुलिस ने अधिवक्ता की पत्नी की शिकायत पर क्राइम इंस्पेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कानून के रखवाले ही कानून को ताक पर रखकर मनमानी करेंगे? और क्या न्याय दिलाने वाले अधिवक्ता भी इस तरह से असुरक्षित महसूस करेंगे? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब जनता और न्याय व्यवस्था दोनों को चाहिए।

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