वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया वाराणसी दौरे के दौरान कुछ विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर अवैध रूप से नज़रबंद करने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए वाराणसी के पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है और जाँच के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने मानवाधिकार आयोग को एक शिकायत भेजी थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री के दौरे के नाम पर वाराणसी पुलिस ने उनकी संस्था के पदाधिकारी अविनाश मिश्रा और कांग्रेस के कई नेताओं को दो दिनों तक उनके ही घरों में अवैध रूप से नज़रबंद रखा। अमिताभ ठाकुर ने इसे पूरी तरह से ‘अवैध’ और ‘आपराधिक कृत्य’ बताया, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

मांगी गई थी एफआईआर और मुआवज़ा अपनी शिकायत में अमिताभ ठाकुर ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए माँग की थी कि इस अवैध नज़रबंदी के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही, उन्होंने अविनाश मिश्रा को 1 लाख रुपये का मुआवज़ा देने की भी माँग की थी। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक देश में किसी भी नागरिक को बिना किसी ठोस कानूनी आधार के उसके घर में बंद नहीं किया जा सकता।

आयोग ने दिया जाँच का आदेश मानवाधिकार आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वाराणसी के पुलिस कमिश्नर को इस मामले की जाँच करने का निर्देश दिया है। आयोग ने आदेश दिया है कि शिकायतकर्ता अमिताभ ठाकुर को भी जाँच में शामिल किया जाए और 14 नवंबर 2025 तक इसकी पूरी रिपोर्ट सौंप दी जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होनी तय हुई है। अब यह देखना होगा कि इस जाँच में क्या सामने आता है और क्या वाकई में पुलिस की यह कार्रवाई सही थी या फिर यह मानवाधिकारों का उल्लंघन था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed