वाराणसी: पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी, मोहित अग्रवाल ने आज अपने कैम्प कार्यालय में एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया। इस बैठक में उन्होंने सभी राजपत्रित अधिकारियों के साथ शहर की कानून-व्यवस्था और जनसुनवाई से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की और कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए।
जनशिकायतों पर पारदर्शिता और जवाबदेही पर ज़ोर – श्री अग्रवाल ने निर्देशित किया कि IGRS पोर्टल पर प्राप्त जनशिकायतों का समयबद्ध और नियमानुसार निस्तारण किया जाए। साथ ही, हर शिकायत के बाद शिकायतकर्ता से फीडबैक लेना अनिवार्य होगा ताकि कार्यवाही में पारदर्शिता बनी रहे और पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

धोखाधड़ी और ज़मीन विवादों पर त्वरित कार्रवाई – बैठक में यह भी तय किया गया कि धोखाधड़ी और भूमि विवादों से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। इसके लिए राजपत्रित अधिकारी नियमित रूप से विवेचकों को बुलाकर मामलों की समीक्षा करें और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें।
गंभीर अपराधों पर विशेष ध्यान – पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गौ-तस्करी, महिला उत्पीड़न, एनडीपीएस एक्ट और एससी-एसटी से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
महिला सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता और प्रशिक्षण आवश्यक – महिलाओं से संबंधित अपराधों पर बोलते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि उपनिरीक्षक स्तर तक के पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाया जाए और उन्हें सैनिटाइजेशन/प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि धर्म परिवर्तन, बच्चा गुमशुदगी और महिला अपराधों के पंजीकरण में कोई लापरवाही न हो।
यातायात व्यवस्था को लेकर सख्त रुख – शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी पुलिस आयुक्त ने पुलिस उपायुक्त (यातायात) को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वाराणसी के अधिक जाम वाले क्षेत्रों में पीक टाइम पर स्वयं उपस्थित रहकर ट्रैफिक की जांच और प्रबंधन सुनिश्चित करें।
गोष्ठी में वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी – इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय) शिवहरी मीणा, अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) राजेश सिंह सहित कई राजपत्रित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य पुलिसिंग को और अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और संवेदनशील बनाना रहा।




