वाराणसी: हाल ही में बनारस में पुलिस और आम जनता के बीच बढ़ते तनाव की खबरें सामने आ रही थीं। ख़ासकर, थानों में और सड़क पर चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर कई शिकायतें मिलीं। सबसे ज़्यादा चिंताजनक घटना भेलूपुर थाना क्षेत्र में हुई, जहाँ चेकिंग के दौरान एक वकील के साथ मारपीट की ख़बर सामने आई।

जब पुलिस पर ही सवाल उठने लगें, तो यह केवल एक घटना नहीं रहती, बल्कि पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा दाग़ बन जाती है। ऐसी घटनाओं से जनता के बीच पुलिस की छवि खराब होती है और विश्वास कम होता है। इसी बात की गंभीरता को समझते हुए, वाराणसी के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और ट्रैफिक निरीक्षकों को साफ़ निर्देश दिए हैं कि पुलिसकर्मी जनता के साथ शिष्ट और सम्मानजनक व्यवहार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार या मारपीट नहीं होनी चाहिए।

क्या हैं नए निर्देश? पुलिस आयुक्त ने कहा कि वाहन चेकिंग केवल मोटर वाहन अधिनियम के नियमों के तहत ही हो। इसका मुख्य उद्देश्य संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित करना होना चाहिए। उन्होंने कुछ ख़ास श्रेणियों का ज़िक्र किया जिन पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है :

  • संदिग्ध व्यक्ति: जो लोग मुँह पर कपड़ा बाँधकर घूम रहे हों।
  • युवा लड़के: जो बिना नंबर प्लेट या तीन सवारी में गाड़ी चला रहे हों।

सबसे अहम बात यह है कि मोहित अग्रवाल ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अगर कोई व्यक्ति अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहा हो, तो उसके साथ बेहद शालीनता और सम्मान से पेश आया जाए।

पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन यह काम सम्मान और विश्वास के साथ होना चाहिए। पुलिस आयुक्त का यह कदम यह दिखाता है कि वाराणसी पुलिस जनता के प्रति अपनी जवाबदेही और संवेदनशीलता को गंभीरता से लेती है। उम्मीद है कि इन निर्देशों से पुलिस और जनता के बीच का रिश्ता और मज़बूत होगा और पुलिस का मानवीय चेहरा लोगों के सामने आएगा।

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