अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी और राजीव कुमार सिंह ने मजबूती से पक्ष रखा।
वाराणसी: न्याय की डगर अक्सर लंबी होती है, लेकिन कभी-कभी अदालतें त्वरित और संतुलित फैसले से राहत भी देती हैं। वाराणसी जनपद की सत्र न्यायाधीश, प्रथम की अदालत ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण मामले में दो अभियुक्तों – दीपक सिंह और गुफरान – को सशर्त जमानत दे दी है। यह मामला वर्ष 2025 में हुई एक ट्रक लूट की घटना से संबंधित है।
क्या था पूरा मामला? – अभियोजन पक्ष के कथानक के अनुसार, 27 अगस्त 2025 को वादी सुनील कुमार यादव अपने ट्रक में रिफाइंड लादकर लखन्दुर गए थे। वहाँ से वापसी में, 05 सितंबर 2025 को, जब वह वाराणसी रिंग रोड पर पुल के पास सुबह लगभग 4:30 बजे अपनी गाड़ी खड़ी करके सो रहे थे, तभी दो व्यक्ति आए और उन्हें आगे चलने के लिए कहकर गाड़ी में बैठ गए। उन्होंने वादी का फोन लिया और उसके मोबाइल से $21,688/- रुपये ट्रांसफर कर लिए।

आगे चलकर दो और लोग मिले, और चारों उतरकर चले गए। इसके बाद वादी को पता चला कि सीट के पीछे रखे $40,000/- रुपये चोरी हो गए थे, और उनका व उनके साथ मौजूद ट्रक ड्राइवर धर्मेन्द्र गौड़ का मोबाइल भी चोर अपने साथ ले गए थे।
पुलिस ने विवेचना के दौरान 11 सितंबर 2025 को अभियुक्त दीपक सिंह और गुफरान को गिरफ्तार किया। दीपक सिंह के पास से एक मोबाइल, $2000/- नकद और एक ज़िंदा कारतूस, जबकि गुफरान के पास से एक मोबाइल, $3000/- नकद और एक ज़िंदा कारतूस बरामद होने का दावा किया गया।
अभियुक्तों का पक्ष और अदालत की दलील – न्यायालय में अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी और राजीव कुमार सिंह ने मजबूती से पक्ष रखा। अभियुक्त दीपक सिंह की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और वह निर्दोष हैं। उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी घटना स्थल से नहीं हुई, और जो $2000/- रुपये बरामद बताए गए, वह उनके खुद के हैं। उन्होंने दावा किया कि 09 सितंबर 2025 को उन्हें प्रतापगढ़ से लौटते समय अज्ञात पुलिस वालों ने पूछताछ के बहाने पकड़ा और फर्जी तरीके से फंसाया।

वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्तों का गंभीर आपराधिक इतिहास है—दीपक सिंह के खिलाफ 8 और गुफरान के खिलाफ 14 मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विवेचना के दौरान अभियुक्तों ने पुलिस बल पर फायरिंग भी की थी।
न्यायालय का फैसला: मानवीय पहलू पर ज़ोर – दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का बारीकी से अध्ययन करने के बाद, न्यायालय ने एक संतुलित फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि, मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्तों की जमानत याचिका स्वीकार किए जाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
न्यायालय ने दीपक सिंह और गुफरान दोनों की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। हालाँकि, यह जमानत सशर्त है। प्रत्येक अभियुक्त को $50,000/- (पचास हजार रुपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र (personal bond) और समान धनराशि की दो जमानतें संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर दाखिल करनी होंगी। इसके अतिरिक्त, उन्हें कुछ अन्य शर्तों के अधीन “अंडरटेकिंग” (undertaking) भी दाखिल करनी होगी।

यह फैसला दर्शाता है कि न्यायपालिका हर मामले को उसकी विशिष्टता के आधार पर देखती है और मानवीय स्वतंत्रता के अधिकार को महत्त्व देती है, भले ही अभियुक्तों पर गंभीर आरोप लगे हों।




