लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों को हटाने को लेकर पंचायती राज विभाग द्वारा जारी एक विवादास्पद आदेश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त नाराजगी जताई है। यह आदेश ग्रामसभा की भूमि से अवैध कब्जा हटाने की कार्यवाही को जाति विशेष (यादव) और धर्म विशेष (मुस्लिम) से जोड़कर निर्देशित करता था, जिसे मुख्यमंत्री ने पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और अस्वीकार्य करार दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है, और इसे जारी करने वाले संयुक्त निदेशक एसएन सिंह को तुरंत निलंबित कर दिया गया है।
क्या था पूरा मामला? – दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब बलिया के डीपीआरओ अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने 2 जुलाई को जिले के सभी विकास खंड अधिकारियों को एक निर्देश जारी किया। यह निर्देश पंचायती राज निदेशक की ओर से 29 जुलाई को जारी एक आदेश का हवाला देते हुए, दो जाति विशेष के लोगों द्वारा गांव की सार्वजनिक जमीनों पर किए गए कब्जों को खाली कराने के लिए अभियान चलाने का था। इस आदेश के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया और बड़े पैमाने पर विवाद खड़ा हो गया।
मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकार की भाषा और सोच पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह न केवल शासन की नीतियों के विरुद्ध है, बल्कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली भी है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जों के खिलाफ कार्यवाही पूरी तरह से निष्पक्षता, तथ्यों और कानून के अनुसार होनी चाहिए, न कि जाति या धर्म के आधार पर।
उन्होंने अधिकारियों को भविष्य में इस तरह की गलती न दोहराने की सख्त चेतावनी भी दी। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार समरसता, सामाजिक न्याय और सबके समान अधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां किसी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह से प्रेरित नहीं हो सकतीं, क्योंकि उनकी प्रतिबद्धता संविधान और न्याय की मूल भावना के प्रति है।
बिना जानकारी के जारी हुआ था आदेश – निदेशालय ने इस आदेश की आनन-फानन में जांच की, जिसमें पता चला कि यह आदेश पंचायती राज निदेशक अमित सिंह की जानकारी के बिना ही संयुक्त निदेशक एसएन सिंह की ओर से जारी किया गया था। इसके बाद तत्काल प्रभाव से इसे रद्द करने और संयुक्त निदेशक एसएन सिंह को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। यह घटना एक बार फिर प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता के महत्व को उजागर करती है।





