अदालत में मनोज कुमार बिंद की ओर से अधिवक्ता ऋषि कान्त सिंह, रजत कान्त सिंह और धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने पैरवी की

वाराणसी: एक महत्वपूर्ण फैसले में वाराणसी के एडीजे एफ.टी.सी. (14वां वित्त विभाग) की अदालत ने NDPS एक्ट से जुड़े एक मामले में आरोपी मनोज कुमार बिंद को जमानत दे दी है। इस फैसले के बाद आरोपी को जेल से रिहा करने का आदेश दिया गया है।

अदालत में मनोज कुमार बिंद की ओर से उनके वकील ऋषि कान्त सिंह, रजत कान्त सिंह और धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने जोरदार पैरवी की। यह मामला भेलूपुर थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 160/2019 से जुड़ा है, जिसमें मनोज कुमार बिंद को धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत अभियुक्त बनाया गया था।

क्या था पूरा मामला? – यह घटना 10 मार्च 2019 की है। उस दिन भेलूपुर थाने के उपनिरीक्षक राम नरेश यादव अपनी टीम के साथ सुदामापुर तिराहे पर वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रहे थे। उसी दौरान खोजवा की तरफ से आ रहे दो युवक पुलिस को देखकर भागने लगे। पुलिसकर्मियों को शक हुआ और उन्होंने पीछा करके दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ करने पर एक ने अपना नाम अक्षय कुमार बिंद और दूसरे ने मनोज कुमार बिंद बताया। दोनों ने स्वीकार किया कि उनके पास गांजा है और इसी वजह से वे भाग रहे थे।

पुलिस ने दोनों की तलाशी ली और उनके पास से लगभग 1.5-1.5 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। दोनों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

जमानत का आधार – मनोज कुमार बिंद की ओर से उनके वकीलों ने अदालत में दलील दी कि यह उनका दूसरा जमानत आवेदन था और बरामद गांजे की मात्रा (लगभग 1.5 किलोग्राम) ‘मध्यम मात्रा’ की श्रेणी में आती है। इसलिए, एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के कठोर प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते।

वकीलों ने यह भी बताया कि पहले भी मनोज को जमानत मिली थी, लेकिन गरीब और अशिक्षित होने की वजह से वह कोर्ट की तारीखों पर उपस्थित नहीं हो पाया, जिसके कारण उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ और उसे 11 अगस्त 2025 को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।

वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि मनोज का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, वह कानून का पालन करने वाला नागरिक है, और अपनी बूढ़ी मां का इकलौता सहारा है। चूंकि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए उसे न्यायिक हिरासत में रखने की अब कोई जरूरत नहीं है।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और सभी दस्तावेजों का निरीक्षण किया। इसके बाद, अदालत ने ₹50,000 के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो प्रतिभूति (श्योरिटी) जमा करने की शर्त पर मनोज कुमार बिंद को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।

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