रिपोर्ट – भुवनेश्वरी मल्लिक

वाराणसी: बनारस की मशहूर गंगा-जमुनी तहजीब एक बार फिर पूरे शबाब पर दिखी। आज यानी 4 सितंबर, गुरुवार की रात ‘मरकजी यौमुन्नबी कमेटी’ के बैनर तले, पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जन्मदिवस यानी जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मौके पर शहर में एक शानदार जुलूस निकाला गया। यह जुलूस शहर की पुरानी परंपरा को निभाते हुए पूरे शान-ओ-शौकत के साथ निकाला गया, जिसमें हर धर्म और समुदाय के लोग शामिल हुए।

जुलूस की शुरुआत बेनियाबाग के हड़हा मैदान से हुई और यह शहर के अलग-अलग हिस्सों से होते हुए आगे बढ़ा। जुलूस सराय हड़हा, छत्तातले, नारियल बाजार, दालमंडी, नई सड़क और भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ मार्ग से गुजरता हुआ नवाब यूसुफ के कुएँ (भीखा शाह गेट) पर आकर खत्म हुआ। जुलूस में शामिल लोगों का जोश और उत्साह देखते ही बनता था।

खास मेहमान और शानदार इंतजाम – इस मौके पर कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र कुरान की तिलावत से हुई। इसके बाद ‘सरपरस्ते आला’ अल्हाज हजरत मौलाना सूफी मोहम्मद जाकिउल्लाह असदुल कादरी ने एक प्रेरणादायक तकरीर दी। इस यादगार जश्न में बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री, जमा खान मुख्य अतिथि (मेहमान-ए-खुसूसी) के रूप में शामिल हुए।

‘मरकजी यौमुन्नबी कमेटी’ के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन, हाजी सैय्यद शकील अहमद ने बैच लगाकर मेहमान-ए-खुसूसी का इस्तकबाल किया, जबकि कमेटी के सेक्रेटरी, हाजी महमूद खान ने उन्हें शॉल पहनाकर स्वागत किया। कमेटी के सभी पदाधिकारियों ने भी माला पहनाकर मेहमान का स्वागत किया।

नात का मुकाबला और सम्मान समारोह – कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए एक भव्य नातिया मुकाबला शुरू हुआ, जिसमें बनारस और बाहर के शहरों की करीब 65 अंजुमनों ने हिस्सा लिया। खबर लिखे जाने तक यह मुकाबला जारी था। इस मुकाबले का फैसला तीन बाहरी शहरों से आए जजों की एक टीम करेगी।

सर्वश्रेष्ठ नात पढ़ने वाली अंजुमनों को 5 सितंबर, शुक्रवार की शाम को दालमंडी स्थित ‘नश्रगाह’ (ताज होटल) से ‘मरकजी यौमुन्नबी कमेटी’ के संरक्षक और पदाधिकारियों द्वारा सम्मानित किया जाएगा, ताकि उनका हौसला बढ़ाया जा सके।

मुख्य अतिथि जमा खान ने इस मौके पर सभी देशवासियों को पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म की दिली मुबारकबाद दी। उन्होंने ‘मरकजी यौमुन्नबी कमेटी’ को इस ऐतिहासिक जश्न को इतनी खूबसूरती से मनाने के लिए भी बधाई दी।

कार्यक्रम का सफल संचालन रेयाज अहमद नूर ने किया, जबकि अंत में इमरान खान ने सभी का शुक्रिया अदा किया। इस दौरान शहर के तमाम गणमान्य नागरिक और हर धर्म के लोग मौजूद रहे, जिन्होंने बनारस की गंगा-जमुनी तहजीब को एक बार फिर से जीवंत कर दिया।

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