वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के मौके पर वाराणसी के होटल डि पेरिस में आयोजित होने वाले डांडिया कार्यक्रम को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। 30 सितंबर को भोजपुरी स्टार पवन सिंह के नाम पर होने वाला कार्यक्रम रद्द होने और उसके बाद हुए हंगामे के बाद, अब खबर है कि 5 अक्टूबर को होने वाला दूसरा डांडिया आयोजन भी रद्द कर दिया गया है। इस पूरे मामले में होटल प्रबंधन ने आयोजकों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिससे कथित व्यापार मंडल की महिला अध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
होटल डि पेरिस के मैनेजर राकेश श्रीवास्तव ने खुद कैंट थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी है। इसके साथ ही, एक अन्य डांडिया कार्यक्रम की आयोजक और व्यापार मंडल की अध्यक्ष बताई जा रही महिला पदाधिकारी ने भी 5 अक्टूबर के कार्यक्रम के आयोजन से पल्ला झाड़ लिया है।

लाखों के टिकट बिके, पर कार्यक्रम रहा ‘फीका’ – पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जनपद के इवेंट प्लानर अनिल साहू और व्यापार मण्डल की एक कथित महिला पदाधिकारी ने 30 सितंबर 2025 को होटल डि पेरिस में गरबा/डांडिया कार्यक्रम आयोजित करने का दावा किया। उन्होंने भोजपुरी गायक पवन सिंह को मुख्य आकर्षण बताकर 500 और 1000 रुपये के टिकट बेचे। अनुमान है कि हजारों लोगों ने टिकट खरीद लिए थे, जिससे आयोजकों की तिजोरी लाखों से भर गई।
मगर यह ‘धंधा’ तब फीका पड़ गया जब आगरा के सोशल एक्टिविस्ट अमन गुप्ता ने पुलिस आयुक्त वाराणसी मोहित अग्रवाल से इसकी शिकायत कर दी। अपनी शिकायत में अमन गुप्ता ने साफ तौर पर कहा कि पवन सिंह के नाम पर हजारों की भीड़ जुटने से अफरा-तफरी हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह आयोजन सनातन धर्म की आड़ में टिकट बेचकर लाखों रुपए कमाने की योजना है, जिसके लिए न तो जिला मनोरंजन अधिकारी और न ही जीएसटी विभाग ने कोई संज्ञान लिया है।
टिकट धारकों का हंगामा, आयोजकों पर मुकदमा – 30 सितंबर को जब टिकट धारकों को कार्यक्रम रद्द होने की जानकारी मिली, तो होटल डि पेरिस के बाहर जमकर हंगामा हुआ। कैंट थाना पुलिस ने किसी तरह लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। इसके तुरंत बाद पुलिस ने इवेंट प्लानर अनिल साहू और उक्त महिला पदाधिकारी सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।
परंपरा या बाजारीकरण? – नवरात्र आते ही गरबा और डांडिया जैसे कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। कुछ लोग जहां इसे एक पवित्र परंपरा के तौर पर मनाते हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इन परंपराओं का बाजारीकरण कर रहे हैं। पवन सिंह के नाम पर हुए इस फर्जीवाड़े ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धर्म और संस्कृति के नाम पर इस तरह से धोखाधड़ी को रोकना जरूरी नहीं है?
फिलहाल, 5 अक्टूबर का कार्यक्रम भी रद्द होने से टिकट खरीदने वाले हजारों लोगों का पैसा अटक गया है, और देखना यह होगा कि धोखाधड़ी के शिकार हुए लोगों को उनका पैसा कब तक वापस मिलता है।






