वाराणसी: 11 जुलाई से पवित्र श्रावण मास की शुरुआत हो चुकी है और कल, यानी 14 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है। इस दिन वाराणसी की धार्मिक नगरी काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए शिव भक्तों का सैलाब उमड़ने वाला है। इस साल सावन में कुल चार सोमवार पड़ रहे हैं और इन सभी दिनों में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री काशी विश्वनाथ धाम में महादेव अपने भक्तों को अलग-अलग और दुर्लभ रूपों में दर्शन देंगे।

पहले सोमवार को सपरिवार दर्शन

सावन के पहले सोमवार को बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का विशेष और पारंपरिक श्रृंगार किया जाता है। इस दिन बाबा विश्वनाथ अपने पूरे परिवार—माता पार्वती, कार्तिकेय और गणेश जी—के साथ दर्शन देते हैं। यह अलौकिक नजारा साल में केवल एक बार ही देखने को मिलता है, जिसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

हर सोमवार बाबा का अलग श्रृंगार

सावन के बाकी सोमवार को भी बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा, जो भक्तों के लिए एक दिव्य अनुभव होगा:

  • दूसरा सोमवार: इस दिन बाबा का गौरी शंकर स्वरूप भक्तों को दर्शन देता है। खास रजत प्रतिमा (चांदी की मूर्ति) को गर्भगृह में लाकर आरती से पहले विशेष रूप से सजाया जाता है। यह स्वरूप शिव और पार्वती के अद्वैत रूप का प्रतीक है।
  • तीसरा सोमवार: तीसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ का अर्धनारीश्वर रूप सजाया जाता है। इस रूप में वे आधे शिव और आधे शक्ति (पार्वती) के रूप में नजर आते हैं, जो शिव और शक्ति के संतुलन को दर्शाता है।
  • चौथा सोमवार: सावन के अंतिम सोमवार पर बाबा का रुद्राक्ष श्रृंगार होता है। इस दिन बाबा को हजारों-लाखों रुद्राक्ष दानों से सजाया जाता है। शिवभक्तों के लिए यह श्रृंगार अत्यंत पावन और शुभ माना जाता है।

इन सबके अलावा, सावन पूर्णिमा के दिन बाबा विश्वनाथ को झूले पर विराजमान किया जाता है, जिसे ‘झूला श्रृंगार’ कहते हैं। यह दृश्य अत्यंत भव्य और भक्तिभाव से परिपूर्ण होता है, जो भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव देता है।

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