साइबर सुरक्षा पर एसीपी डॉ. ईशान सोनी (आईपीएस) की खास जानकारी
वाराणसी के जैतपुरा थाना क्षेत्र में, खासकर व्यापारिक समुदाय को साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण जागरूकता अभियान चलाया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों को डिजिटल दुनिया के खतरों और हाल ही में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों के बारे में जागरूक करना था।

एसीपी चेतगंज डॉ. ईशान सोनी (आईपीएस) ने व्यापारियों को साइबर सुरक्षा की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि किस तरह से जालसाज लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला: जहां अपराधी खुद को पुलिस या अधिकारी बताकर ऑनलाइन धमकाते हैं।
निवेश और ऋण घोटाला: ऊंचे मुनाफे का लालच देकर या तुरंत ऋण देने के बहाने पैसे ऐंठना।
फर्जी आपातकालीन घोटाला: परिवार के किसी सदस्य के मुसीबत में होने का बहाना बनाकर पैसे मांगना।
केवाईसी अपडेट घोटाला: बैंक या किसी संस्था का कर्मचारी बनकर गोपनीय जानकारी चुराना।
साइबर फ़िशिंग और स्मिशिंग: ईमेल या मैसेज के ज़रिए नकली लिंक भेजकर डेटा चोरी करना।
मैलवेयर हमले: आपके डिवाइस में खतरनाक सॉफ्टवेयर डालकर जासूसी करना या उसे लॉक कर देना।

डॉ. सोनी ने सभी व्यापारियों को सलाह दी कि वे किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, अपनी गोपनीय जानकारी (OTP, PIN, पासवर्ड) किसी के साथ साझा न करें और हमेशा आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें।
तीन नए कानूनों पर भी दी गई महत्वपूर्ण जानकारी – जागरूकता अभियान में तीन नए कानूनों – भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इन कानूनों का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।

मुख्य बातें जो व्यापारियों के लिए जानना ज़रूरी है – ज़ीरो एफ़आईआर (Zero FIR): अब पीड़ित किसी भी थाने में शिकायत दर्ज करा सकता है, भले ही अपराध उस थाना क्षेत्र में न हुआ हो। ई-एफ़आईआर (E-FIR): कुछ अपराधों के लिए अब घर बैठे ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराने की सुविधा। समयबद्ध निस्तारण: जाँच और मुकदमों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का प्रावधान। अपराध स्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग: अब कुछ गंभीर अपराधों के लिए क्राइम सीन की वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी, जिससे सबूतों को मजबूत किया जा सके।
यह अभियान जैतपुरा के व्यापारिक समुदाय के लिए एक बड़ी पहल साबित हुई, जिससे उन्हें डिजिटल और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर खुद को सुरक्षित रखने की जानकारी मिली।




