अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हृदयानंद यादव एवं कुलदीप गुप्ता ने पक्ष रखा

वाराणसी। न्याय प्रणाली में अक्सर यह देखा जाता है कि ठोस पैरवी और विधिक तथ्यों की सही प्रस्तुति बड़े से बड़े मामले में भी राहत का मार्ग प्रशस्त कर देती है। ऐसा ही एक मामला वाराणसी न्यायालय में देखने को मिला, जहाँ अभियोजन के कड़े विरोध के बावजूद हेमंत यादव को जमानत मिल गई। सारनाथ पुलिस द्वारा दर्ज गंभीर धाराओं के इस मामले में, बचाव पक्ष की सशक्त पैरवी से मिली न्यायिक राहत ने कानूनी गलियारों में चर्चा छेड़ दी है।

यह मामला वाराणसी के थाना सारनाथ से जुड़ा है, जहाँ अपराध संख्या 580/2025 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। अभियुक्त हेमंत यादव पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे, जिनमें मुख्य रूप से धारा 303(2), 317(2), 317(4), 317(5), 319(2), 318, 338 एवं 336(2) शामिल हैं।

इस मामले की सुनवाई माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या–14), वाराणसी के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील यानी अभियोजन पक्ष ने हेमंत यादव की जमानत का पुरजोर और घोर विरोध किया। अभियोजन का तर्क था कि अपराध की प्रकृति गंभीर है, इसलिए अभियुक्त को राहत नहीं दी जानी चाहिए। हालाँकि, अभियोजन के कड़े विरोध के बावजूद हेमंत यादव को जमानत दिलाने में उनके अधिवक्ताओं की दलीलें निर्णायक साबित हुईं।

अभियुक्त हेमंत यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हृदयानंद यादव एवं कुलदीप गुप्ता ने मोर्चा संभाला। बचाव पक्ष के वकीलों ने न्यायालय के सामने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रखे अज्ञात के नाम पर फंसाना: अधिवक्ताओं ने दलील दी कि मूल मुकदमा अज्ञात के खिलाफ था और हेमंत यादव को बिना किसी ठोस आधार या साक्ष्य के इसमें घसीटा गया है। बरामदगी का अभाव: न्यायालय को बताया गया कि अभियुक्त के पास से कोई भी आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई है। संलिप्तता के प्रमाण नहीं: पुलिस द्वारा पेश की गई कहानी में अभियुक्त की संलिप्तता का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।

दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद, माननीय न्यायालय ने बचाव पक्ष के विधिक तर्कों को स्वीकार किया। न्यायालय ने माना कि तथ्यों और विधिक आधारों पर अभियुक्त राहत का हकदार है। अंततः, न्यायालय ने हेमंत यादव को ₹75,000-₹75,000 के दो जमानत बंधपत्र (Bail Bonds) और दो प्रतिभूतियाँ जमा करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश जारी किया। इस प्रकार, बचाव पक्ष की सशक्त पैरवी से मिली न्यायिक राहत ने हेमंत यादव के लिए जेल से बाहर आने का रास्ता साफ कर दिया।

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