वाराणसी। एक तरफ काशी विश्वनाथ धाम और अन्य विकास परियोजनाओं से बनारस की तस्वीर बदल रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के भीतर कुछ ऐसे भी निर्माण चल रहे हैं, जो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) लगातार अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, लेकिन शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण वीडीए की “कुंभकर्णी नींद” की पोल खोल रहे हैं।
मामला वाराणसी के कोतवाली और जैतपुरा थाना क्षेत्रों का है। बीएम ब्रेकिंग न्यूज की पड़ताल में सामने आया है कि बिल्डर और भवन स्वामी किस तरह नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी कर रहे हैं, और वीडीए के अधिकारी-कर्मचारी इस सब से बेखबर या शायद जानबूझकर आँखें मूंदे हुए हैं।
हमारी ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि कोतवाली थाना क्षेत्र के नाटीइमली, ईश्वरगंगी रोड पर स्थित भवन संख्या K 67/100, जो सुनील स्वर्ण कला केंद्र के ठीक बगल में है, वहाँ बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण चल रहा है। इसी तरह, जैतपुरा थाना क्षेत्र के रामकटोरा में, हैप्पी मॉडल स्कूल के पास, भवन संख्या J 12/18-55P, रामकटोरा धुपचंडी रोड के बगल में भी अवैध रूप से एक नई इमारत खड़ी की जा रही है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये निर्माण कार्य किसी से छिपे नहीं हैं। ये दोनों ही जगहें मुख्य सड़कों पर हैं, जहाँ से वीडीए के संबंधित अंचल के क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों का रोज़ आना-जाना होता होगा। फिर भी, उनकी नज़र इन पर अब तक क्यों नहीं पड़ी, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। स्थानीय लोग दबी जुबान में बताते हैं कि “मिलीभगत” के बिना इस तरह खुलेआम नियमों को तोड़ना नामुमकिन है।
यह तब हो रहा है, जब वाराणसी विकास प्राधिकरण समय-समय पर उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत नोटिस जारी करने और अवैध निर्माणों को सील करने की खबरें जारी करता रहता है। तो फिर सवाल उठता है कि क्या वीडीए की कार्रवाई सिर्फ़ “खास” लोगों पर होती है, या फिर कुछ प्रभावशाली बिल्डर और भवन स्वामी ऐसे हैं जिनके आगे प्राधिकरण के नियम-कानून धरे के धरे रह जाते हैं?
इन अवैध निर्माणों से न केवल शहर के नियोजन की धज्जियाँ उड़ रही हैं, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी समस्याएँ पैदा हो रही हैं। संकरी गलियों में ये बड़े व्यावसायिक निर्माण भविष्य में ट्रैफिक जाम और पार्किंग की बड़ी समस्या खड़ी करेंगे, जिसकी चिंता न तो बिल्डर को है और न ही जिम्मेदार विभाग को।
बीएम ब्रेकिंग न्यूज वाराणसी विकास प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों से यह पूछना चाहता है कि इन साफ़-साफ़ मामलों में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या क्षेत्रीय अधिकारियों की कोई जवाबदेही तय की जाएगी? आखिर कब तक बिल्डरों और भवन स्वामियों का यह गठजोड़ शहर की सूरत बिगाड़ता रहेगा और वीडीए मूकदर्शक बना रहेगा?





