वाराणसी दालमंडी ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक ने आज शहर के ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र में हलचल तेज कर दी है। प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी इलाके में जर्जर भवनों के नाम पर की जा रही तोड़फोड़ की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में प्रशासन के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने का निर्देश दिया है।

वाराणसी दालमंडी ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक: क्या है पूरा मामला? वाराणसी का दालमंडी इलाका अपनी संकरी गलियों और ऐतिहासिक व्यापारिक महत्व के लिए जाना जाता है। हाल के दिनों में, प्रशासन ने ‘चौड़ीकरण’ और ‘जर्जर भवनों’ का हवाला देकर यहाँ कई डिमोलिशन ऑर्डर (ध्वस्तीकरण आदेश) जारी किए थे। इस कार्रवाई के खिलाफ सैयद अब्बास मुर्तजा शम्सी ने याचिका दाखिल की थी।

आज इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने वाराणसी दालमंडी ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि कानून को ताक पर रखकर कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

अदालत में चली तीखी बहस: प्रशासन पर उठे सवाल याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद फरमान हैदर नकवी ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि प्रशासन ‘जर्जर भवन’ के नोटिस को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के व्यापारियों और निवासियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। चौड़ीकरण के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) और नगर निगम के कार्यबल पर तीखे सवाल पूछे। वाराणसी दालमंडी ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा कि किसी भी भवन को गिराने से पहले कानूनी मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

व्यापारियों में खुशी की लहर, बुल्डोजर पर लगा ब्रेक – पिछले कई दिनों से दालमंडी के सैकड़ों दुकानदार और निवासी बुल्डोजर की कार्रवाई के डर के साये में जी रहे थे। वाराणसी दालमंडी ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक के बाद इलाके में व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उनका उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निष्कर्ष और अगली सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप ने फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई पर ब्रेक लगा दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई तक कोई भी अवैध ध्वस्तीकरण नहीं होगा। वाराणसी दालमंडी ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक के इस फैसले ने न्यायपालिका में आम आदमी के विश्वास को और मजबूत किया है। अब देखना यह होगा कि वाराणसी प्रशासन इस पर क्या जवाब दाखिल करता है। मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होनी तय है।

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