अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव व चंद्रबली पटेल ने दलीलें रखीं।
वाराणसी। समूह की महिलाओं से धोखाधड़ी कर उनसे लाखों रुपये लेकर उनका लोन का किश्त जमा करने के बजाय गबन कर जाने के मामले में आरोपित को कोर्ट से राहत मिल गई है। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने करमा (सोनभद्र) निवासी आरोपित शिवम सिंह को 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें एवं बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव व चंद्रबली पटेल ने दलीलें रखीं।
क्या है पूरा मामला? स्पंदना स्पूर्ति फाइनेंशियल लिमिटेड कंपनी की चौबेपुर शाखा के प्रबंधक रोहित कुमार ने चौबेपुर थाने में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तहत पंजीकृत है, जो ग्रामीण महिलाओं को समूह में उनके छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन प्रदान करती है और साप्ताहिक किश्तों के जरिए कलेक्शन करती है।

चौबेपुर शाखा में जब महिला ग्राहकों की शिकायतें आने लगीं, तो आंतरिक जांच-पड़ताल की गई। जांच में पाया गया कि शाखा के दो कर्मचारी—राहुल कुमार यादव और शिवम सिंह—कंपनी के नियमों के विरुद्ध गलत तरीके से महिला ग्राहकों से पैसे वसूल रहे थे और उसे बैंक खाते में जमा नहीं कर रहे थे।
लाखों रुपये के गबन का खुलासा जांच रिपोर्ट के अनुसार : राहुल कुमार यादव (ऋण अधिकारी): महिला ग्राहकों से ₹1,27,665 वसूले, जिसमें से केवल ₹20,760 लोन खाते में जमा किए और बाकी ₹1,06,905 का गबन कर लिया। शिवम सिंह (ऋण अधिकारी): महिलाओं से कुल ₹3,83,637 एकत्र किए, जिनमें से ₹1,88,960 खाते में जमा कराए और शेष ₹1,94,677 हड़प लिए। दोनों कर्मचारियों ने मिलकर कुल ₹3,01,565 का गबन किया। कंपनी के अधिकारियों द्वारा बार-बार संपर्क करने के बावजूद कर्मचारियों ने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया था।
पुलिस कार्रवाई और अदालत का फैसला मामले की गंभीरता को देखते हुए चौबेपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शिवम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब अदालत में बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद जिला जज ने शर्तों के साथ शिवम सिंह की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।



