BM Breaking News की पड़ताल में उठे बड़े सवाल: दो-दो सरकारी नोटिस जारी होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और भवन स्वामी मौन क्यों हैं? क्या जिम्मेदार तंत्र किसी बड़ी जनहानि या हादसे के होने का इंतजार कर रहा है? जनता की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर लापरवाही का जवाबदेह कौन होगा?
वाराणसी: जनपद के प्रसिद्ध चौक थाना क्षेत्र स्थित दालमंडी गली चौड़ीकरण का कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है। इस महाअभियान के तहत मार्ग को चौड़ा करने के लिए कई भवनों को ध्वस्त किया जा चुका है। हालांकि, इसी दालमंडी चौड़ीकरण के बीच एक ऐसी लापरवाही सामने आई है जो राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए सीधे तौर पर काल साबित हो सकती है।
दालमंडी स्थित भवन संख्या सीके 39/5 (छपरिया गली, दालमंडी) का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्तिकरण के बाद आधा-अधूरा और बेहद जर्जर अवस्था में छोड़ दिया गया है। BM Breaking News की पड़ताल में सामने आया है कि इस लटकते और झुके हुए जर्जर निर्माण से कभी भी कोई बड़ी जनहानि या भीषण दुर्घटना हो सकती है।

नगर निगम ने जारी की थी 7 दिनों में ध्वस्तीकरण की कड़ी नोटिस = इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के क्षेत्रीय जोनल अधिकारी व सहायक नगर आयुक्त द्वारा दिनांक 25 जून 2026 को भवन स्वामी शाहनवाज खान (पुत्र शमसुद्दीन) एवं समस्त अध्यासी को एक आधिकारिक पत्र व नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस की प्रति पुलिस उपायुक्त (सुरक्षा एवं अभिसूचना) को भी अवलोकन हेतु भेजी गई थी।
नगर निगम के अभियंताओं (Engineers) द्वारा किए गए निरीक्षण की आख्या रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था : संरचना की स्थिति: भवन का बाहरी हिस्सा और दीवार पूरी तरह से जर्जर और अस्थिर अवस्था में है। झुकाव व खतरा: भवन के कई हिस्से साहुल में नहीं हैं और बाहर की ओर खतरनाक तरीके से झुके हुए हैं, जो किसी भी वक्त गिर सकते हैं। सुरक्षा का जोखिम: यह स्थिति वहां रहने वाले लोगों, आसपास के निवासियों और सामने वाले मार्ग से गुजरने वाले आम राहगीरों के जीवन व संपत्ति के लिए अत्यंत गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही है।
नोटिस के जरिए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि इस खतरनाक संरचना को 7 दिवस के भीतर अपने स्वयं के व्यय पर पूर्णतः ध्वस्त कर जोखिम समाप्त किया जाए। साथ ही, कार्य के दौरान सुरक्षा हेतु बाड़/घेरा (Barricading) और चेतावनी संकेत लगाने का भी आदेश दिया गया था।
31 जुलाई 2026 को दोबारा जारी हुई नोटिस, फिर भी ढिलाई = 7 दिनों की मियाद बीत जाने के बाद भी जब धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो नगर निगम द्वारा पुनः 31 जुलाई 2026 को दूसरी नोटिस जारी की गई। इसमें भवन के जर्जर हिस्से को तत्काल खाली कराने और ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए। इतना ही नहीं, भवन खाली कराने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु पुलिस आयुक्त वाराणसी, जिलाधिकारी (DM) वाराणसी, सहायक पुलिस आयुक्त और थाना प्रभारी चौक समेत तमाम उच्च अधिकारियों को लिखित रूप में अवगत कराया गया।
कागजों में सिमटी कार्रवाई, उठ रहे गंभीर सवाल = प्रशासनिक स्तर पर कागजी घोड़ों की दौड़ और नोटिसों के आदान-प्रदान के बावजूद वर्तमान समय में धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। आज भी दालमंडी चौड़ीकरण के इस मार्ग से रोजाना गुजरने वाले हजारों राहगीर, स्थानीय व्यापारी और उस भवन में रह रहे अध्यासी खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। लटकती हुई दीवारें हर पल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं।
BM Breaking News की पड़ताल में उठे बड़े सवाल : दो-दो सरकारी नोटिस जारी होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और भवन स्वामी मौन क्यों हैं? क्या जिम्मेदार तंत्र किसी बड़ी जनहानि या हादसे के होने का इंतजार कर रहा है? जनता की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर लापरवाही का जवाबदेह कौन होगा?
फिलहाल, इस जर्जर भवन का भविष्य और राहगीरों की सुरक्षा का सवाल ठंडे बस्ते में नजर आ रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर BM Breaking News की पड़ताल लगातार जारी है।


