अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने पैरवी करते हुए अपना पक्ष रखा
वाराणसी। प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने के चलते प्रसूता की मौत हो जाने के मामले में आरोपित अस्पताल संचालक को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सप्तम) प्रवीण कुमार की अदालत ने चौबेपुर निवासी आरोपित अस्पताल संचालक महेंद्र यादव को 25 हजार रुपये का एक जमानतदार और समान राशि का बंधपत्र दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।
अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने पैरवी करते हुए अपना पक्ष रखा, जिसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के उपरांत जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

क्या है पूरा मामला? = प्रकरण के अनुसार, नेवादा (चौबेपुर) निवासी मिथिलेश कुमार ने चौबेपुर थाने में मामले की तहरीर दी थी। पीड़ित पति का आरोप था कि 2 अगस्त 2026 को उसने अपनी 22 वर्षीय पत्नी कंचन कुमारी को डिलीवरी के लिए रुस्तमपुर चौधरी नगर स्थित अभय क्लिनिक मैटरनिटी होम में भर्ती कराया था।
अस्पताल में उपचार के दौरान सिजेरियन ऑपरेशन से कंचन ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। पीड़ित का आरोप है कि डिलीवरी के दौरान अस्पताल संचालक महेंद्र यादव, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर और वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ की घोर लापरवाही और असावधानी के कारण उसकी पत्नी कंचन की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मृत्यु हो गई। तहरीर में बताया गया कि स्थिति गंभीर होने पर उसे आनन-फानन में हाईटेक अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को वापस लाकर अभय क्लिनिक में रख दिया गया।
पुलिस कार्रवाई और कोर्ट का फैसला = पीड़ित पति मिथिलेश की तहरीर के आधार पर चौबेपुर पुलिस ने 3 अगस्त 2026 को अस्पताल संचालक महेंद्र यादव और अन्य स्टाफ के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
इसी मामले में शनिवार को आरोपी अस्पताल संचालक महेंद्र यादव ने अपने वकील के जरिए एसीजेएम (सप्तम) की अदालत में आत्मसमर्पण किया और जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। अदालत ने मामले की गंभीरता और प्रस्तुत तर्कों को ध्यान में रखते हुए अस्पताल संचालक महेंद्र यादव की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली और उन्हें सशर्त रिहा करने का निर्देश दिया।


