अभियुक्त पक्ष से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी व विवेक मिश्रा ने मजबूती से पक्ष रखा
वाराणसी: जिले के सत्र न्यायालय से लालपुर-पाण्डेयपुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में अभियुक्त वैभव गुप्ता को बड़ी राहत मिली है। न्यायालय सत्र न्यायाधीश, वाराणसी के समक्ष प्रस्तुत अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र सं0 3788 / 2026 पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी वैभव गुप्ता की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। यह मामला थाना लालपुर-पाण्डेयपुर के मु०अ०सं०- 323/2026 से संबंधित है, जिसमें बीएनएस की कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की बात सामने आई थी।
मामला और वकीलों के तर्क = न्यायालय में दाखिल किए गए विवरण के अनुसार, प्रार्थी एवं अभियुक्त वैभव गुप्ता (पुत्र धीरज कुमार गुप्ता, निवासी- मकान नंबर एस.ए-2/418सी-1, पाण्डेयपुर, थाना लालपुर-पाण्डेयपुर, वाराणसी) की ओर से यह पहला अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र पेश किया गया था। अभियुक्त पक्ष से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी व विवेक मिश्रा ने मजबूती से पक्ष रखते हुये कहा कि उसे इस मामले में गलत और फर्जी ढंग से आरोपी बनाया गया है, जबकि उसने कोई अपराध कारित नहीं किया है।

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष और विद्वान जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने थाने की आख्या का हवाला देते हुए पक्ष रखा। दोनों पक्षों के तर्कों को गंभीरता से सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों व प्रपत्रों का बारीकी से परिशीलन करने के बाद सत्र न्यायालय ने गुणदोष पर बिना कोई राय व्यक्त किए अग्रिम जमानत का आधार पर्याप्त पाया।
न्यायालय का आदेश और शर्तें = न्यायालय सत्र न्यायाधीश, वाराणसी ने वैभव गुप्ता का अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए निम्नलिखित शर्तों के अधीन राहत प्रदान की है : व्यक्तिगत बंधपत्र: अभियुक्त वैभव गुप्ता को 50,000/- (पचास हजार रुपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो प्रतिभू (सुरक्षा) प्रस्तुत करने होंगे। गिरफ्तारी से राहत: निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने पर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की स्थिति में उन्हें तुरंत अग्रिम जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा। जांच में सहयोग: अभियुक्त को यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि जब भी आवश्यकता होगी, वह स्वयं को पुलिस अधिकारी के समक्ष पूछताछ के लिए प्रस्तुत करेंगे। गवाहों और तथ्यों को प्रभावित न करना: अभियुक्त प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी ऐसे व्यक्ति को धमकी, वचन या लालच नहीं देंगे जो मामले के तथ्यों से वाकिफ हो, ताकि वे सही तथ्य न्यायालय या पुलिस के सामने रख सकें। देश न छोड़ना: न्यायालय की पूर्व स्वीकृति के बिना अभियुक्त देश नहीं छोड़ सकेगा।
अदालत के इस आदेश की एक प्रति सूचनार्थ पुलिस आयुक्त, वाराणसी को भी प्रेषित कर दी गई है।



