अभियुक्त की ओर से मुख्य रूप से अधिवक्ता हृदयानंद यादव और कुलदीप गुप्ता द्वारा पैरवी की गई
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कचहरी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के न्यायालय से एक मामले में आरोपी को बड़ी राहत मिली है। थाना कैंट क्षेत्र से जुड़े एक आपराधिक मामले में आरोपी साजिद कुरैशी (पुत्र इजहार कुरैशी) की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया है।
क्या है पूरा मामला? = यह पूरा मामला वाराणसी के थाना कैंट में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या- 235/2026 (राज्य बनाम वाहिद कुरैशी व अन्य) से संबंधित है। इस मामले में पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—धारा 74, 75, 115(2), 351(2), 352—तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। प्रकरण के सिलसिले में अभियुक्त साजिद कुरैशी ने दिनांक 8 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी के समक्ष आत्म समर्पण किया और अपना जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।

न्यायालय में पक्षों की दलीलें = सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि अभियुक्त को इस मामले में पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के तहत फंसाया गया है। अभियुक्त ने कथित रूप से कोई अपराध कारित नहीं किया है, इसलिए उन्हें न्यायहित में जमानत का लाभ मिलना चाहिए।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। हालांकि, न्यायालय ने मामले के समस्त तथ्यों, परिस्थितियों, अभियुक्त के आत्मसमर्पण करने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया। इसके उपरांत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने साजिद कुरैशी का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।
शर्तों के आधार पर रिहाई का आदेश = न्यायालय ने अभियुक्त साजिद कुरैशी को ₹20,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र (Personal Bond) तथा उतनी ही धनराशि के एक विश्वसनीय प्रतिभू (Surety) को न्यायालय में प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।
इस मामले में अभियुक्त की ओर से मुख्य रूप से अधिवक्ता कुलदीप गुप्ता और हृदयानंद यादव द्वारा पैरवी की गई, जबकि सत्यम गुप्ता, महिमा गुप्ता, जिक्रा कुरैशी और आदित्य शंकर गुप्ता ने विधि कार्य में सहयोग प्रदान किया। न्यायालय द्वारा यह आदेश 8 अक्टूबर 2026 को पारित किया गया, जिसके बाद निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर अभियुक्त को जमानत का लाभ प्राप्त हुआ।


