न्यायालय में एडीजीसी संतोष तिवारी एवं शिकायतकर्ता के अधिवक्ता हिमांचल सिंह,अधिवक्ता प्रवीण कुमार गौतम एवं अधिवक्ता जीतेन्द्र यादव ने, मजबूती से पक्ष रखा 

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में वित्तीय धोखाधड़ी और जालसाजी के मामलों पर न्यायालय की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-06) आलोक कुमार की अदालत ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी कुशाग्र श्रीवास्तव (पुत्र सौरभ श्रीवास्तव, निवासी- सारंग तालाब तपोवन आश्रम, नक्खीघाट, सारनाथ, वाराणसी) का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र (Anticipatory Bail Application No. 3389/2026) खारिज कर दिया है। आरोपी के खिलाफ थाना कैंट में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। न्यायालय में एडीजीसी संतोष तिवारी एवं शिकायतकर्ता के अधिवक्ता हिमांचल सिंह, अधिवक्ता प्रवीण कुमार गौतम एवं अधिवक्ता जीतेन्द्र यादव ने मजबूती से पक्ष रखा।

क्या है पूरा मामला और अभियोजन पक्ष का आरोप? = वादिनी मुकदमा नीलिमा सिंह (पत्नी अजय सिंह, निवासी- शिवरतनपुर, थाना भेलूपुर, वाराणसी) ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि अभियुक्त कुशाग्र श्रीवास्तव और उसकी पत्नी शुभांगी श्रीवास्तव ‘Good Life Financial Hub’ एवं ‘Good Life HDFC Hub’ नाम से एक फर्जी संस्था चलाते हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये लोग खुद को निवेश सलाहकार बताकर लोगों को ऊंचे मुनाफे और मासिक ब्याज का लालच देते थे। वादिनी को बेटी की शादी की पारिवारिक परिस्थिति का झांसा देकर 25 मार्च 2025 को कुल 4,00,000 रुपये निवेश के नाम पर ठग लिए गए। शुरुआती कुछ महीनों में छोटा-मोटा ब्याज देकर विश्वास जीता गया, लेकिन बाद में मूलधन और ब्याज दोनों देने से मना कर दिया गया। जब वादिनी ने पैसे मांगे, तो आरोपियों और उनके अज्ञात साथियों द्वारा जान से मारने की धमकी दी गई।

बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन और संगठित गिरोह का खुलासा = जांच में यह बात सामने आई कि अभियुक्तों द्वारा ‘GOOD LIFE FINANCIAL HUB’ और अन्य खातों के जरिए भारी मात्रा में संदिग्ध लेनदेन किए गए हैं। पुनीता सिंह नामक सुपरवाइजर के बैंक स्टेटमेंट में 5 लाख, 5.5 लाख और अन्य बड़े ट्रांजैक्शन मिले हैं। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि यह एक संगठित गिरोह (Organized Racket) की तरह काम कर रहा था, जो लोगों को ठगने के बाद अपने कार्यालय बंद कर फरार हो गया था। इसके आधार पर थाना कैंट में 13 अगस्त 2026 को मुकदमा संख्या 413/2026, धारा 316(2), 351(3), 61 बी.एन.एस. के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

अग्रिम जमानत खारिज होने का मुख्य आधार = सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता ने खुद को निर्दोष बताते हुए फर्जी मुकदमे में फंसाए जाने की दलील दी और अग्रिम जमानत की मांग की। वहीं, शासकीय अधिवक्ता (फौ.) ने इसका कड़ा विरोध किया।

न्यायालय ने पत्रावली के परिशीलन और अभियुक्त के आपराधिक इतिहास की जांच कराई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। थाने से मिली रिपोर्ट के अनुसार कुशाग्र श्रीवास्तव पर पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें अपराध संख्या 413/2026 (थाना कैंट, वर्तमान मामला), अपराध संख्या 81/2025 (थाना लालपुर/पाण्डेयपुर), अपराध संख्या 229/2026 (थाना लालपुर/पाण्डेयपुर)

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण निर्णय (मुनेश बनाम उत्तर प्रदेश सरकार) का हवाला देते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमानत याचिका में अपने लंबित आपराधिक इतिहास का विवरण छुपाना अपने आप में जमानत निरस्त करने का पर्याप्त आधार है। अभियुक्त के वकीलों द्वारा याचिका में इन मामलों का जिक्र नहीं किया गया था। इन गंभीर तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने कुशाग्र श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

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