उत्तर प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, राज्य सरकार ने अब उन्हें बेहतर और सुरक्षित रहने की सुविधा देने के लिए एक नई पहल की है। पुरानी “पेइंग गेस्ट” नीति को खत्म करते हुए, सरकार ने “उत्तर प्रदेश बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) एवं होम स्टे नीति 2025” लागू कर दी है। यह नई नीति न केवल शहर में होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट के संचालन को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी “रूरल होम स्टे” खोलने का रास्ता साफ करेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से अतिथियों की सेवा में सुधार होगा और पर्यटकों को रहने के बेहतर विकल्प मिलेंगे।

पर्यटन उद्योग को मिलेगा नया ‘घर’, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर : सरकार की यह नई नीति प्रदेश के पर्यटन उद्योग को एक नई दिशा देने वाली है। देसी और विदेशी पर्यटकों को अब होटलों के अलावा स्थानीय घरों में रहने का अनुभव मिलेगा, जो उन्हें संस्कृति और जीवनशैली को करीब से समझने का मौका देगा। इसके साथ ही, यह नीति स्थानीय लोगों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।

संयुक्त निदेशक (पर्यटन) दिनेश सिंह ने बताया कि नई नीति में पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा के मानकों के साथ-साथ संचालकों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

अब 6 कमरों से हो सकेगी कमाई, नियम भी हुए स्पष्ट : एक बड़ा बदलाव यह है कि अब भवन मालिक पांच की जगह अधिकतम छह कमरों से आय कर सकेंगे। पहले केवल पांच कमरों की अनुमति थी। दिनेश सिंह ने बताया कि नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि:

  • बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना का संचालन केयर टेकर निवास करके कर सकता है। यानी, अगर मालिक घर में नहीं भी है, तो कोई और उसकी देखभाल कर सकता है।
  • वहीं, होम स्टे और रूरल होम स्टे दोनों योजनाओं में भवन स्वामी का परिवार के साथ निवास करना अनिवार्य होगा। यह पर्यटकों को एक वास्तविक घरेलू अनुभव देने के लिए है।

यह नई नीति निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में पर्यटन को एक नया आयाम देगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। क्या आप अपने घर को होम स्टे में बदलने के बारे में सोच रहे हैं?

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