आदिवासी दलित क्रांति सेना ने केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ दिल्ली कूच किया। पन्ना और छतरपुर के 22 गांवों के आदिवासियों ने कहा- न्याय दो या मौत दो। पूरी खबर bmbreakingnews.com पर।

पन्ना/छतरपुर: बुंदेलखंड की धरती से दिल्ली की सत्ता तक गूँज पहुँचाने के लिए निकले आदिवासियों और दलितों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। आदिवासी दलित क्रांति सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि आदिवासी दलितों के साथ अन्याय अत्याचार बर्दाश्त नहीं होगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित हजारों ग्रामीणों ने अपनी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ‘दिल्ली कूच’ का ऐलान किया, जिसे रोकने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है।

वन अधिकार यात्रा: दिल्ली कूच और प्रशासन की घेराबंदी – आदिवासी दलितों की समस्याओं और उनके संवैधानिक हक की आवाज उठाने के लिए वन अधिकार यात्रा का आयोजन किया गया। जय किसान संगठन और आदिवासी दलित क्रांति सेना के नेतृत्व में यह यात्रा दिल्ली की ओर प्रस्थान करने वाली थी। हालांकि, प्रशासन ने आंदोलनकारियों को रोकने के लिए डायमंड चौक, पन्ना पर भारी बैरिकेडिंग कर दी।

प्रशासनिक रुकावटों के बावजूद, आदिवासियों का जज्बा कम नहीं हुआ। जब उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया, तो उन्होंने निर्माण स्थल (ढोड़न बांध) पर ही डेरा डाल दिया और हुंकार भरी— “न्याय दो या मौत दो!”

केन-बेतवा लिंक परियोजना: उजाड़ दिए 22 गांव – केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण मानी जाने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना अब पन्ना और छतरपुर के गरीबों के लिए मुसीबत बन गई है। प्रभावित क्षेत्र: पन्ना जिले के 14 आदिवासी बहुल गांव और छतरपुर जिले के 8 गांव। मुख्य समस्या: ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन बलपूर्वक उनकी पुश्तैनी जमीन और घर छुड़ा रहा है। मुआवजे की पारदर्शिता: नियम और अधिनियम के तहत ग्रामीण मुआवजे और पुनर्वास की स्पष्ट जानकारी मांग रहे हैं, जो उन्हें नहीं दी जा रही है।

“गरीब आदिवासियों को उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था किए बिना उजाड़ना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। हम प्रधानमंत्री से सीधे न्याय की गुहार लगाने दिल्ली जा रहे थे, लेकिन हमें रास्ते में ही बंधक बनाने की कोशिश की गई।” — आंदोलनकारी कार्यकर्ता

आंदोलन के दौरान केपी सिंह बुंदेला ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पन्ना के आदिवासियों के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर बड़े राजनीतिक दल चुप क्यों हैं? उन्होंने कहा कि जब आदिवासियों का अस्तित्व खतरे में है, तब राजनेताओं की चुप्पी उनकी मिलीभगत को दर्शाती है।

आदिवासी दलित क्रांति सेना का संकल्प – आदिवासी दलितों के साथ अन्याय अत्याचार बर्दाश्त नहीं होगा: आदिवासी दलित क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने घोषणा की है कि पन्ना जिले में हो रहे इस अन्याय की जानकारी वे दिल्ली जाकर केंद्र सरकार तक पहुँचाएंगे। हालांकि 7 अप्रैल को सेना ने अपने अलग कार्यक्रम को निरस्त कर, दिल्ली कूच महाआंदोलन में पूर्ण सहयोग देने का वादा किया है।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि उन्हें उनकी जमीन का सही हक और उचित पुनर्वास नहीं मिला, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। “न्याय दो या मौत दो” का नारा अब बुंदेलखंड के हर गांव की आवाज बन चुका है।

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