वाराणसी। नई दिल्ली में लोकतांत्रिक आंदोलन के दौरान छात्रों और युवाओं पर हुए बर्बर लाठीचार्ज और क्रूर दमन की गूँज अब वाराणसी की सड़कों पर भी सुनाई दे रही है। इस दमनकारी कार्रवाई के विरोध में अपना दल कमेरावादी मशाल जुलूस निकालकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
यह मशाल जुलूस शाम ठीक 6:00 बजे जिला मुख्यालय स्थित शास्त्री घाट से शुरू हुआ। हाथों में जलती हुई मशालें और न्याय की मांग करते हुए कार्यकर्ताओं का यह हुजूम सर्किट हाउस और गोलघर होते हुए डॉ. अंबेडकर पार्क पहुँचा, जहाँ यह जुलूस एक विरोध सभा में तब्दील हो गया।

दमन नहीं, संवाद करे सरकार : संजय पटेल = सभा को संबोधित करते हुए अपना दल (कमेरावादी) के जिलाध्यक्ष संजय पटेल ने केंद्र सरकार की नीतियों और पुलिसिया कार्रवाई पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि :
“रोजगार और शिक्षा जैसे संवैधानिक अधिकारों की गारंटी मांगना कोई अपराध नहीं है। सरकार को इन बुनियादी सवालों पर आंदोलनकारी युवाओं से संवाद करना चाहिए, न कि उन पर लाठियाँ बरसानी चाहिए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और पूरे सिस्टम को युवाओं के प्रति जवाबदेह (Accountable) बनाना होगा।”
संजय पटेल ने आगे कहा कि सरकार द्वारा किया गया यह दमन पूरी तरह से गैर-लोकतांत्रिक और एक आपराधिक कृत्य है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पार्टी इसका पुरजोर विरोध करती रहेगी।
युवाओं के हक के लिए सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग = वाराणसी में आयोजित इस अपना दल कमेरावादी मशाल जुलूस में युवाओं और छात्रों के अधिकारों की आवाज को बुलंद करने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान सरकार विरोधी नारेबाजी से माहौल गर्माया रहा।
आंदोलन में शामिल प्रमुख चेहरे = गगन प्रकाश यादव (प्रदेश महासचिव), राजेश प्रधान, उमेश चंद्र मौर्य, अभय पटेल, सिकंदर पटेल, शमशेर बहादुर वर्मा, संजय आर्य (एडवोकेट) शामिल रहे।
छात्रों के समर्थन में उतरे इन नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक युवाओं को उनका हक नहीं मिल जाता और लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।



