अदालत में आरोपियों की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने की।
वाराणसी: नगर के चर्चित मैनेजर बंधक बनाकर डकैती और फिरौती मांगने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। दुर्गाकुंड स्थित एक संस्था के मैनेजर को बंधक बनाने, मारपीट करने और परिजनों से फिरौती वसूलने के इस सनसनीखेज मामले में दो आरोपियों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अपर जिला जज (प्रथम) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
क्या है पूरा मामला? = अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुकदमा राजकुमार सिंह ने भेलूपुर थाने में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनका पुत्र सम्राट सिंह दुर्गाकुंड स्थित ‘निलांचल जगन्नाथ सेवा एलपीटी’ में पिछले 7 महीनों से मैनेजर के पद पर कार्यरत था। 6 सितंबर 2026 की सुबह करीब 9:30 बजे सम्राट के मोबाइल से एक घबराया हुआ फोन आया। उसने अपने पिता से कहा, “पापा हमें बचा लो, नहीं तो ये लोग मार डालेंगे और 5 लाख 50 हजार रुपये लेकर तुरंत चले आओ।” जब पिता ने कारण जानना चाहा, तो फोन कट गया। इसके बाद जब परिजनों ने दोबारा संपर्क किया, तो संस्था के मालिक धवल पटेल ने फोन उठाकर गंभीर आरोप लगाए।

होटल में बंधक बना कर मारपीट और जबरन वसूली = परिजनों का आरोप है कि जब वे घबराहट में मकान की मूल रजिस्ट्री लेकर वाराणसी पहुंचे, तो उनके पुत्र को होटल हरे कृष्णा में बंधक बनाकर रखा गया था। काफी कोशिशों के बाद जब परिजनों की मुलाकात सम्राट से कराई गई, तो उसके सिर से खून बह रहा था और शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे। पीड़ित पिता ने आरोप लगाया कि धवल पटेल, सुधीर यादव, समीर खान, रविशंकर कुमार और कुलशेखर पाण्डेय जैसे लोगों ने उनके बेटे को बुरी तरह पीटा। इतना ही नहीं, आरोपियों ने परिजनों के मोबाइल भी जमा कर लिए और रिश्तेदारों को फोन कर पैसों के लिए दबाव बनाया।
लखनऊ और प्रतापगढ़ तक खींचा मामला = शिकायत के मुताबिक, 7 सितंबर 2026 की शाम को आरोपियों ने पीड़ित की पत्नी के गहने (चेन, अंगूठी, झुमका और पायल) छीन लिए और उन्हें बेचकर नकदी हासिल की। इसके बाद उसी रात आरोपियों ने पीड़ित परिवार को जबरन अपनी गाड़ी में बैठाया और उनके लखनऊ स्थित मकान पर ले गए। वहां दबाव बनाकर 1-1 लाख रुपये के चार चेक और 40 हजार रुपये का एक अन्य चेक हासिल किया गया। यही नहीं, इसके बाद आरोपियों ने प्रतापगढ़ स्थित उनके पैतृक गांव (ग्राम बढ़नी, पोस्ट पणवासी, थाना लीलापुर) पहुंचकर घर और जमीन का वीडियो बनाया। अगले दिन वाराणसी लाकर एक स्टांप पेपर पर जबरन हस्ताक्षर भी करवाए गए। इस गंभीर मामले में पुलिस ने पहले ही मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज दिया था।
अदालत से आरोपियों को मिली जमानत = इस बहुचर्चित मामले में सुनवाई करते हुए अपर जिला जज (प्रथम) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने सुसुवाही, चितईपुर निवासी आरोपी रविशंकर कुमार और सुधीर कुमार यादव को 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें और बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत में आरोपियों की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने की। वाराणसी की इस अदालत के फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।



