वाराणसी: काशी के हृदय, दालमण्डी में सड़क चौड़ीकरण का मामला केवल विकास की गाथा नहीं, बल्कि वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) की कार्यशैली पर लगे गंभीर सवालों का आईना भी बन गया है। एक ओर प्रशासन जल्द से जल्द सड़क चौड़ी कर काशी विश्वनाथ धाम तक सुगम मार्ग बनाने की होड़ में है, तो दूसरी ओर उन दुकानदारों और कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है, जो इस चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं।

इस बीच, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक पोस्ट ने VDA की पूरी ‘पोल’ खोलकर रख दी है, जिससे जनता का गुस्सा भड़क उठा है।

वायरल पोस्ट का ‘ब्लास्ट’ और VDA की ‘खामोशी’ – वायरल पोस्ट के मुताबिक, दालमण्डी सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले 12 मकानों के नक्शे ही पास नहीं हैं।

VDA ने इन ‘अवैध’ भवनों को चिन्हित करते हुए भवन स्वामियों को नोटिस भेजी है और चौंकाने वाली बात यह है कि उन्हें मकान खाली करने के लिए केवल तीन दिन की मोहलत दी गई है। VDA के जोनल अधिकारी ने साफ़ कर दिया है कि अवैध निर्माण पर कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

जोनल अधिकारी ने कहा, “बिना नक्शे वाले 12 भवनों को नोटिस भेजी गई है। भवन स्वामियों को तीन दिनों के अंदर मकान खाली करने को कहा गया है। तय समयसीमा के अंदर मकान खाली नहीं हुए तो प्राधिकरण विभागीय कार्रवाई करेगा।”

एक ओर पुलिस प्रशासन क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों पर नजर रखने में जुटा है, वहीं इस नोटिस ने VDA की भ्रष्टाचार से भरी कार्यशैली पर कई बड़े और असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।

VDA की ‘कुम्भकर्णीय निद्रा’: तीन तीखे सवाल – यह वायरल पोस्ट वाराणसी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर सीधे-सीधे उंगली उठाता है।

पहला सवाल: जब इन अवैध भवनों का निर्माण हो रहा था, तब VDA के क्षेत्रीय अधिकारी व कर्मचारी क्या कुम्भकर्णीय निन्द्रा में सो रहे थे? निर्माण के समय ही इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

दूसरा सवाल: क्या शहर भर में जिस तरह आज भी अवैध निर्माण VDA के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से किए जा रहे हैं, क्या ये 12 निर्माण भी उसी का नतीजा हैं? अगर हाँ, तो VDA उन भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर कब कार्रवाई करेगा?

तीसरा सवाल: आज जब दालमण्डी सड़क चौड़ीकरण का मामला शुरू हुआ है, क्या तभी VDA को इन अवैध निर्माणों की याद आई? इससे पहले प्राधिकरण के अधिकारी क्या कर रहे थे?

भ्रष्टाचार चरम पर, आदेश हास्यास्पद – यह बात किसी से छिपी नहीं है कि वाराणसी विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। सच्चाई यह भी है कि कोई भी गैरकानूनी निर्माण या कार्य बिना किसी भी विभाग की मिलीभगत से नहीं हो सकता।

आज जब दालमण्डी चौड़ीकरण का मामला विरोध के साथ अपने शिखर पर है, तब VDA अधिकारियों को इन ‘अवैध’ भवनों की याद आना और आनन-फानन में तीन दिन का अल्टीमेटम देना, उनकी कार्यशैली पर एक हास्यास्पद स्थिति को जन्म देता है।

जनता सवाल कर रही है कि इन अवैध निर्माणों को सालों तक अपनी ‘छाया’ देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी, या क्या एक बार फिर केवल छोटे कर्मचारियों और भवन स्वामियों पर गाज गिरेगी?

निष्कर्ष: दालमण्डी चौड़ीकरण का यह मामला केवल एक ‘विकास परियोजना’ नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थाओं की पिछली लापरवाहियों (VDA), व्यापारियों के जीवन (रोजी-रोटी) और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के बीच चल रहे एक जटिल संघर्ष को दर्शाता है। यह स्पष्ट है कि विकास और विस्थापन की यह लड़ाई अभी लम्बी चलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed