कांग्रेस भी आई मैदान में, अजय राय ने प्रधानमंत्री को ठहराया जिम्मेदार
सपा नेता सुरेंद्र पटेल का तीखा बयान: “वाराणसी में हो रही है लोकतंत्र की हत्या”
वाराणसी। शहर के ऐतिहासिक दालमंडी बाजार में चल रहे कथित चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस कार्रवाई से प्रभावित व्यापारी, मकान मालिक और किराएदार अब सड़क से लेकर दिल्ली के गलियारों तक अपनी आवाज पहुँचाने की तैयारी में हैं।
इसी सिलसिले में, चंदौली से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह मुलाकात व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत और उम्मीद लेकर आई है, जो पिछले कई दिनों से प्रशासनिक दबाव और अपने पेट पर पड़ रही लात से त्रस्त हैं।

व्यापारियों का दर्द, सांसद का ज्ञापन – सांसद वीरेंद्र सिंह के सामने दालमंडी के व्यापारियों ने अपनी समस्याओं का पुलिंदा खोल दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह से प्रशासन भू-माफियाओं की तरह जबरदस्ती और जोर-जबरदस्ती करके उनकी पीढ़ियों पुरानी रोजी-रोटी छीनने पर तुला है।
प्रतिनिधिमंडल में सपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र पटेल, सपा प्रवक्ता मनोज राय धूपचंडी, संजीव सिंह, ओ पी सिंह, और पूर्व विधायक समद अंसारी जैसे कई कद्दावर नेता मौजूद रहे।
व्यापारियों की जायज मांगों को सुनने के बाद सांसद वीरेंद्र सिंह ने तुरंत एक ज्ञापन एडीएम सिटी आलोक वर्मा को सौंपा। एडीएम सिटी ने आश्वासन दिया कि पत्रक को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा और उनकी भावनाओं की कद्र की जाएगी, लेकिन व्यापारियों की आंखों में डर अभी भी साफ झलक रहा है।

सांसद वीरेंद्र सिंह: ‘ये जबरदस्ती भू-माफियाओं जैसी है!’ – मुलाकात के बाद सांसद वीरेंद्र सिंह ने सीधे तौर पर शासन-प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “दालमंडी गली के व्यापारियों, मकान मालिकों और किरायेदारों ने अपनी पीड़ा और मांगें रखीं। उनकी मांगे जायज हैं, लेकिन शासन-प्रशासन में बैठे लोग जोर-जबरदस्ती और भू-माफियाओं जैसी हरकतें कर रहे हैं।”
उन्होंने कानूनी पहलू पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “आप किस कानून के तहत भूमि अधिग्रहण कर रहे हैं? अगर 2013 के अधिनियम के तहत कर रहे हैं, तो उसका पालन कीजिए, लेकिन अब तक आप ऐसा नहीं कर रहे हैं।” सांसद ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी हर अन्याय के खिलाफ खड़ी है। उन्होंने ऐलान किया कि 13 नवंबर को वह दिल्ली जाकर गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से इस पूरे मामले को अवगत कराएंगे।

सपा नेता सुरेंद्र पटेल: ‘यह विकास नहीं, विनाश है’ – सपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र पटेल ने इस कार्रवाई को विकास नहीं, बल्कि विनाश करार दिया। उन्होंने कहा, “सपा सरकार में भी चौड़ीकरण हुआ था, लेकिन लोगों की सहमति और कानून के तहत। भाजपा सरकार जबरदस्ती और धमकी देकर जनता को उजाड़ रही है।”
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “दालमंडी गरीबों और मध्य वर्ग की मंडी है, जहाँ पूर्वांचल, बिहार और मध्य प्रदेश के लोग व्यापार करते हैं। भाजपा सरकार गरीबों की रोजी-रोटी पर हमला कर रही है। विकास की आड़ में जनता को उजाड़ना लोकतंत्र की हत्या है।”

कांग्रेस भी आई मैदान में: अजय राय ने प्रधानमंत्री को ठहराया जिम्मेदार – दालमंडी विवाद पर विपक्षी दल अब एकजुट होते दिख रहे हैं। सपा के बाद, कांग्रेस भी व्यापारियों के समर्थन में उतर आई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी मंगलवार को प्रभावित दुकानदारों व व्यापारियों से मुलाकात की और प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अजय राय ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए बिना सहमति के अधिग्रहण और ध्वस्तीकरण कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि, “यदि व्यापारियों, दुकानदारों और उनके परिवारों को कुछ हुआ, तो वाराणसी के सांसद के नाते इसकी सीधे जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की होगी।”

उन्होंने कहा कि, “दालमंडी में व्यापारी कई पीढ़ियों से आबाद हैं। तीन-तीन, चार-चार पीढ़ियों से इनकी दुकानें यहीं हैं। इन गरीब व्यापारियों को उजाड़ा जा रहा है। उनके पेट पर लात मारने का काम किया जा रहा है।” उन्होंने मुआवजे के मुद्दे पर भी सवाल उठाया और कहा, “दुकानदारों की रोजी-रोटी चली जाएगी तो मुआवजा लेकर क्या करेंगे?”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि, “प्रशासन चाहे बुलडोजर ले आए या कुछ और, काशी की जनता दालमंडी के व्यापारियों के साथ खड़ी है। सरकार को संवेदना के साथ काम करते हुए सभी पक्षों से वार्ता कर आपसी सहमति से निर्णय लेना चाहिए।


