वाराणसी। हर हर महादेव! धर्म, आध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी इस साल एक और दिव्य उत्सव के लिए तैयार है। अगर आप सोच रहे हैं कि दीपावली खत्म हो गई, तो ज़रा रुकिए! दिवाली के ठीक 15 दिन बाद आने वाला वह अद्भुत पर्व जिसकी प्रतीक्षा देश-विदेश के लाखों लोग करते हैं, वह है – देव दीपावली (Dev Deepawali)।
इस वर्ष, कार्तिक पूर्णिमा का यह महाशुभ दिन 5 नवंबर, बुधवार को पड़ रहा है, और इसी तिथि पर भगवान शिव की नगरी वाराणसी में देव दीपावली का भव्य उत्सव मनाया जाएगा।

स्वर्ग से धरती पर देवताओं का आगमन – सनातन धर्म में इस तिथि का महत्व इतना विशेष है कि इसे ‘देवताओं की दिवाली’ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सभी देवी-देवता स्वयं स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक पर आते हैं! वे गंगा स्नान करते हैं और काशी में होने वाले इस भव्य दीपोत्सव के साक्षी बनते हैं। कल्पना कीजिए, काशी के 84 घाटों पर एक साथ लाखों दीप जल रहे हों और स्वयं देवता वहाँ मौजूद हों! यह नज़ारा सचमुच दिव्य, अलौकिक और अविस्मरणीय होता है।
देव दीपावली का सीधा संबंध भगवान शिव से – क्या आप जानते हैं कि इस पर्व का सीधा संबंध महादेव से है? जी हाँ! इसी कारण देव दीपावली को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि यह पर्व भगवान शिव की एक महान विजय को समर्पित है।

वह पौराणिक कथा, जब महादेव ने लिया महाविनाशक रूप – पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस तारकासुर के तीन पुत्रों – तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान पाया था कि उन्हें कोई पराजित न कर सके। इस वरदान के बल पर वे तीनों लोकों में आतंक फैलाने लगे और उन्होंने तीन अभेद्य नगर (त्रिपुर) बना लिए। उनके अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव से उन्हें मारने की प्रार्थना की।
तब, स्वयं महादेव ने एक असंभव रथ और अस्त्र से कार्तिक पूर्णिमा के दिन उन तीनों असुरों (त्रिपुरासुर) का वध कर उनके नगरों को नष्ट कर दिया। यह अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की सबसे बड़ी विजय थी।

इस महान विजय के उपलक्ष्य में ही देवताओं ने काशी नगरी में दीप प्रज्वलित कर खुशियाँ मनाईं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
क्यों है काशी में इसका विशेष महत्व? – दीपों की नगरी: इस दिन वाराणसी के सभी 84 घाट दीपों की अनगिनत लौ से ऐसे जगमग होते हैं, मानो आकाश के सारे तारे धरती पर उतर आए हों। गंगा आरती: शाम के समय पारंपरिक गंगा आरती का भव्य आयोजन होता है, जहाँ हजारों भक्त माँ गंगा को दीपों से आलोकित करते हैं। हर हर महादेव: पूरी नगरी दीपों की रोशनी में नहाई होती है, हर तरफ ‘हर हर महादेव’ के जयघोष गूंजते हैं। आकर्षण का केंद्र: यह पर्व न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक सुंदरता का प्रतीक भी है, यही कारण है कि देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं।




