वाराणसी के अहिल्याबाई घाट पर वेब सीरीज “घूसखोर पंडित“ के खिलाफ ब्राह्मणों और बटुकों ने जमकर प्रदर्शन किया। मनोज वाजपेयी की भूमिका और सीरीज के नाम पर नाराजगी जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बताया।
वाराणसी। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली वेब सीरीज को लेकर विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली, भोपाल और पश्चिमी यूपी के बाद अब वेब सीरीज “घूसखोर पंडित“ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की आंच धर्मनगरी काशी तक पहुँच गई है। शुक्रवार को वाराणसी के ऐतिहासिक अहिल्याबाई घाट पर ब्राह्मण समाज के लोगों और बटुकों ने एकजुट होकर इस वेब सीरीज के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
अहिल्याबाई घाट पर जुटे प्रदर्शनकारियों के हाथों में वेब सीरीज “घूसखोर पंडित“ के मुख्य अभिनेता मनोज वाजपेयी की तस्वीरें थीं। काशी के ब्राह्मणों और बटुकों ने सीरीज के नाम और उसमें दिखाए गए चित्रण पर गहरी आपत्ति जताई। प्रदर्शन के दौरान बटुकों ने जमकर नारेबाजी की और वेब सीरीज के निर्माता व कलाकारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल सदस्यों का स्पष्ट कहना है कि वेब सीरीज “घूसखोर पंडित“ उनके धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जानबूझकर निशाना बना रही है। उनके अनुसार सीरीज में ब्राह्मण समाज को नकारात्मक और अपमानजनक रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस तरह की सामग्री समाज में गलत संदेश फैलाती है और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम करती है। “पंडित” शब्द के साथ “घूसखोर” जैसा विशेषण जोड़ना करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान है।
प्रदर्शनकारियों ने मशहूर अभिनेता मनोज वाजपेयी को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि एक मंझे हुए कलाकार को अपनी भूमिका और प्रोजेक्ट के चयन में अधिक संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। खासकर जब विषय किसी विशेष धार्मिक समुदाय या परंपरा से जुड़ा हो, तो उसे व्यावसायिक लाभ से ऊपर उठकर भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
आपको बता दें कि वेब सीरीज “घूसखोर पंडित“ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी लड़ाई भी शुरू हो चुकी है। दिल्ली हाईकोर्ट: सीरीज पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की गई है। लखनऊ एफआईआर: लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में फिल्म के निर्देशक और टीम के खिलाफ सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और वैमनस्यता फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। देशव्यापी आक्रोश: भोपाल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक ब्राह्मण समाज इस मामले को लेकर आंदोलित है। काशी के ब्राह्मणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस अपमानजनक सामग्री को तत्काल बंद नहीं किया गया, तो वे इस आंदोलन को और भी उग्र करेंगे।



