लेखक – अबू हुरैरा

लाइफस्टाइल डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम पैसा कमाने और रुतबा हासिल करने के पीछे इस कदर अंधे हो चुके हैं कि जीवन का असली आनंद भूल गए हैं। अक्सर हम भविष्य के सुख के लिए अपना वर्तमान दांव पर लगा देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक उम्र के बाद इन चीजों की वैल्यू (Value) कितनी रह जाती है? आइए जानते हैं जीवन के उन पड़ावों के बारे में जहाँ पहुँचकर इंसान को अहसास होता है कि उसने क्या खोया और क्या पाया।

40 की उम्र: जब डिग्री महज एक कागज बन जाती है अक्सर देखा गया है कि 40 की उम्र के बाद पढ़ाई और डिग्री की कोई वैल्यू नहीं रहती। कई बार जब हम किसी चाय वाले या छोटे व्यापारी के पास खड़े होते हैं, तो पता चलता है कि वह व्यक्ति भले ही पढ़ा-लिखा न हो, लेकिन उसकी इनकम एक डिग्री धारक से कहीं ज्यादा है, और वह भी टैक्स फ्री। उस समय अपनी सालों की पढ़ाई और मेहनत पर थोड़ा धक्का जरूर लगता है, क्योंकि असल जीवन में अनुभव और हुनर की वैल्यू ज्यादा होने लगती है।

50 की उम्र: सुंदरता का फीका पड़ना 50 की उम्र के बाद सुंदरता की कोई वैल्यू नहीं होती। चेहरे पर झुर्रियां आने लगती हैं और शरीर ढलने लगता है। एक समय जो व्यक्ति शीशे के सामने घंटों बिताता था, वह सजना-संवरना भी बंद कर देता है। इस उम्र में आकर समझ आता है कि बाहरी सुंदरता अस्थायी है, केवल आपका स्वभाव और व्यवहार ही स्थायी रहता है।

60 की उम्र: पद और प्रतिष्ठा का अंत – रिटायरमेंट की उम्र यानी 60 साल के बाद पद और प्रतिष्ठा की वैल्यू भी खत्म हो जाती है। हो सकता है कि किसी समय आपके एक हस्ताक्षर (Sign) से पूरा शहर या दफ्तर चलता हो, लेकिन 60 के बाद स्थिति बदल जाती है। वही चपरासी जो कभी आपके आगे-पीछे घूमता था, शायद आपको सलाम करना भी जरूरी न समझे। पद का अहंकार इस उम्र में आकर पूरी तरह टूट जाता है।

70 की उम्र: छोटा घर बनाम बड़ा घर – 70 साल की उम्र के बाद घर छोटा हो या बड़ा, इसकी भी कोई वैल्यू नहीं रह जाती। यदि आपने मेहनत करके डबल मंजिला मकान बनाया है, तो बुढ़ापे में ऊपर चढ़ने में घुटनों का दर्द आपको रुला देगा। उस समय एक छोटा सा कमरा या छोटा घर ही ज्यादा सुकून और आराम देता है।

80 की उम्र: बैंक बैलेंस और दवाइयाँ – सबसे कड़वा सच 80 साल की उम्र में पता चलता है। आपके अकाउंट में करोड़ों रुपये पड़े हों, लेकिन वे आपके किसी काम के नहीं होते। आपको रोज खानी तो वही 100 रुपये की गोलियां ही हैं। जिस पैसे को इकट्ठा करने के लिए आपने दिन-रात एक किया, प्रपंच रचे और अपना स्वास्थ्य दांव पर लगा दिया, उसका आनंद अब दूसरे लोग उठाएंगे।

निष्कर्ष: आज में जीना सीखें हम सब बुढ़ापे की तरफ बढ़ रहे हैं और अंत में हमारा संघर्ष केवल बीमारियों से होगा। इसलिए, आप जीवन के जिस भी पड़ाव पर हैं, वहीं रुकें और जो कुछ भी ईश्वर ने आपको दिया है, उसका आनंद लें। जीवन प्रकृति का दिया सबसे अनमोल तोहफा है। पैसे के पीछे इतना न भागें कि आप जीना ही भूल जाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *