वाराणसी। शहर में मानवता की एक दिल को छू लेने वाली मिसाल देखने को मिली है। थाना चेतगंज क्षेत्र में एक अज्ञात व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद, जब उसकी शिनाख्त नहीं हो पाई, तो स्थानीय समाजसेवी ज़ाहिर बाबा ने इंसानियत का परिचय देते हुए उसका अंतिम संस्कार मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ पूरा कराया।

क्या था मामला? – दरअसल, चेतगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक अज्ञात व्यक्ति के मृत पाए जाने की सूचना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची थी। तमाम कोशिशों के बाद भी मृतक की पहचान शुरू में नहीं हो सकी, जिसके चलते शव को ज़रूरी कानूनी कार्यवाही पूरी कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

पोस्टमार्टम के दौरान कुछ ऐसे संकेत मिले जिससे यह पता चला कि मृतक व्यक्ति मुस्लिम धर्म से संबंधित था। यह जानकारी मिलते ही, थाना चेतगंज की चौकी नाटी इमली ने स्थानीय समाजसेवा के लिए जाने-पहचाने नाम ज़ाहिर बाबा को इसकी सूचना दी।

ज़ाहिर बाबा बने सहारा – सूचना मिलते ही ज़ाहिर बाबा अपने साथियों के साथ बिना देर किए पोस्टमार्टम हाउस पहुँचे। उन्होंने कागज़ी औपचारिकताएं पूरी की और फिर एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबका दिल जीत लिया। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए, ज़ाहिर बाबा और उनकी टीम ने मिलकर पूरी ज़िम्मेदारी के साथ मृतक का अंतिम संस्कार (दफन) मुस्लिम धार्मिक परम्पराओं के अनुसार संपन्न कराया।

“मानवता सबसे बड़ा धर्म” – इस नेक कार्य के बारे में बात करते हुए ज़ाहिर बाबा ने कहा, “मानवता सबसे बड़ा धर्म है। जब कोई अज्ञात व्यक्ति भी हमारे बीच से चला जाए, तो उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करना हमारा फ़र्ज़ बन जाता है। हमें यह नहीं देखना चाहिए कि वह किस जाति या धर्म का है, बल्कि यह देखना चाहिए कि वह एक इंसान है।”

पुलिस प्रशासन ने की सराहना – इस पूरे वाकये के दौरान पुलिस प्रशासन का भी सराहनीय सहयोग रहा। थाना चेतगंज के अधिकारियों ने ज़ाहिर बाबा और उनकी टीम के इस प्रयास की जमकर प्रशंसा की। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे कार्य समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारे का मज़बूत संदेश देते हैं, और यह साबित करते हैं कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

ज़ाहिर बाबा के इस कदम ने न सिर्फ मृतक को सम्मान दिलाया, बल्कि पूरे शहर को यह संदेश भी दिया कि विपरीत परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का सहारा बनना ही सच्ची इंसानियत है।

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