NDA की प्रचंड जीत पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। जानिए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने बिहार चुनाव के नतीजों और काउंटिंग प्रक्रिया पर क्या कहा। क्या अखिलेश यादव को NDA की जीत ‘हजम’ नहीं हो रही?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA गठबंधन की प्रचंड जीत ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। जहाँ NDA खेमे में जश्न का माहौल है, वहीं विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव, ने इस NDA की प्रचंड जीत पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक, अखिलेश यादव ने बिहार चुनाव के नतीजों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह जीत ‘दल नहीं, छल’ का परिणाम है, और उन्होंने चुनाव आयोग तथा मतगणना प्रक्रिया पर भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रश्नचिह्न लगाया है।

अखिलेश यादव के मुख्य सवाल: ‘प्रचंड जीत’ पर विपक्ष का संदेह
बिहार चुनाव में NDA ने प्रचंड जीत हासिल करते हुए 200 से अधिक सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस परिणाम पर अखिलेश यादव ने जो सवाल उठाए हैं, उनके केंद्र में मुख्य रूप से ये मुद्दे हैं:
- ईवीएम और मतगणना की विश्वसनीयता: कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अखिलेश यादव ने मतगणना के शुरुआती रुझानों और अंतिम परिणामों में भारी अंतर को लेकर संदेह व्यक्त किया है। उनका इशारा ईवीएम (EVM) और एसआईआर (SIR) पर है, जिस पर वह पहले भी सवाल उठा चुके हैं।
- बीजेपी पर छल का आरोप: सपा प्रमुख ने बीजेपी पर ‘छल’ की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह जीत बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ‘नहीं चलेगी’ और वहाँ की जनता NDA के मंसूबों को नाकाम कर देगी।
- महिलाओं को लेकर वादे: एक अन्य बयान में, अखिलेश यादव ने भाजपा से उनके महिला केंद्रित वादों (जैसे ₹10,000 की सहायता) को पूरा करने का समय पूछा है, जिसका उपयोग NDA ने अपनी प्रचंड जीत के लिए एक कारण के रूप में किया है।

‘NDA की प्रचंड जीत पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल’: राजनीतिक मायने
अखिलेश यादव का यह स्टैंड विपक्षी एकता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, जहाँ उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर शानदार प्रदर्शन किया था, वहीं बिहार की NDA की प्रचंड जीत पर उनका यह बयान विपक्ष के भीतर की निराशा को दर्शाता है।
हालांकि, अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि हार-जीत से सीख मिलती है। उनके लगातार सवाल उठाना यह संकेत देता है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों, खासकर यूपी में 2027 के चुनाव, के लिए भाजपा पर हमलावर मुद्रा बनाए रखेंगे।

निष्कर्ष: क्या NDA की जीत पर सवाल उठाना विपक्ष की रणनीति है?
बिहार में NDA की प्रचंड जीत ने न केवल राज्य की, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर दी है। भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ने न केवल बहुमत हासिल किया है, बल्कि एक मजबूत जनादेश भी प्राप्त किया है। इसके बावजूद, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं का लगातार सवाल उठाना उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य जनमानस में संदेह पैदा करना और अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है।
समय ही बताएगा कि NDA की प्रचंड जीत पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल भविष्य की राजनीति को किस ओर ले जाते हैं।





