प्रेमानंद महाराज के लिए मुस्लिम समुदाय की दुआएँ, जीवित है गंगा-जमुनी तहज़ीब

वाराणसी: दुनिया में कई देश हैं, जिनकी अपनी पहचान है, अपना इतिहास है, लेकिन भारत जैसी ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ का मुकाबला दुनिया का कोई भी मुल्क नहीं कर सकता। हमारा हिन्दुस्तान सिर्फ एक भूभाग नहीं है, यह हज़ारों साल पुरानी एक ऐसी संस्कृति है, जहाँ हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोग न सिर्फ़ साथ रहते हैं, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं।

इतिहास गवाह है, जब भी देश पर कोई संकट आया, चाहे वह देश हित का मामला हो या आम जनता की भलाई का, हमारे दोनों समुदायों ने हमेशा एकजुट होकर मिसाल पेश की है। कोरोना काल की भयावहता भला कौन भूल सकता है, जब लोगों ने धर्म की दीवारें तोड़कर एक-दूसरे की मदद की थी।

ताज़ा मिसाल जिसने दिल जीत लिया – अगर हम ताज़ा मामलों पर गौर करें, तो एक ऐसी ख़बर सामने आई है जिसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हमारा प्यारा हिन्दुस्तान कैसा है। देश के प्रसिद्ध और पूजनीय संत प्रेमानंद महाराज की अचानक तबीयत ख़राब हुई, तो सिर्फ़ हिन्दू समुदाय ही नहीं, बल्कि देश के मुस्लिम समुदाय ने भी उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआएँ और प्रार्थनाएँ कीं।

यह अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। यह घटना सीधे-सीधे यह साबित करती है कि भारत में आज भी ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ न सिर्फ़ ज़िंदा है, बल्कि हर मुश्किल की घड़ी में और भी मज़बूत हो जाती है।

नफ़रत फैलाने वालों के मुँह पर करारा तमाचा – प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के लिए मुस्लिम समुदाय की इस दिल से निकली दुआ ने दो बातें स्पष्ट कर दीं। सम्मान का प्रदर्शन: इससे पता चलता है कि देश में साधु-संतों का सम्मान किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। सच्चे संत हर धर्म के लोगों के लिए आदरणीय होते हैं। एकता की शक्ति: यह उन चंद राजनीतिक लोगों के मुँह पर एक करारा तमाचा है, जो अपने असफल प्रयासों से देश की हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे में विघ्न डालने की कोशिश करते रहते हैं।

    सच्चाई यह है कि भारतीयता की पहचान किसी धर्म या जाति से नहीं, बल्कि इस आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे से है। यह देश का आम नागरिक ही है, जो दिलों को जोड़कर रखता है। प्रेमानंद महाराज के लिए मुस्लिम समुदाय की यह प्रार्थना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यही है हमारा प्यारा हिन्दुस्तान, और इसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब आज भी ज़िंदा है।

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