न्यायालय में अभियुक्त प्रशांत शर्मा का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता स्वतंत्र जायसवाल ने रखा।
वाराणसी। जनपद के न्यायालय सत्र न्यायाधीश, वाराणसी ने एक महत्वपूर्ण फैसले में प्रशांत कुमार शर्मा को अग्रिम ज़मानत दे दी है। प्रशांत शर्मा पर एक बुजुर्ग प्रोफेसर से लिफ्ट लगाने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप था। वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के दयाल इनक्लेव निवासी प्रशांत कुमार शर्मा के अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र संख्या 2650/2025 को न्यायालय ने आज स्वीकार कर लिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता स्वतंत्र जायसवाल ने रखा पक्ष – न्यायालय में अभियुक्त प्रशांत शर्मा का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता स्वतंत्र जायसवाल ने रखा। गौरतलब है कि थाना मंडुवाडीह में प्रशांत शर्मा के खिलाफ मुअसं0-65/2025 धारा-352, 351(3), 318(4), 316(2), 338, 336(3) बी.एन.एस. के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मामला बुजुर्ग डॉ. लक्ष्मीकांत पाण्डेय की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिन्होंने प्रशांत शर्मा पर लिफ्ट का काम अधूरा छोड़ने और पैसे हड़पने का आरोप लगाया था।
क्या है पूरा मामला? – अभियोजन के कथानक के अनुसार, वादी डॉ. लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने अपने मकान में एलिवेटर (लिफ्ट) लगवाने के लिए प्रशांत कुमार शर्मा से कुल ₹5,76,000 में बात तय की थी। डॉ. पाण्डेय ने विभिन्न किश्तों में प्रशांत शर्मा को यह पूरी रकम (चेक और नकद के माध्यम से) दे दी थी। इसमें 8 मार्च 2024 को ₹51,000, 27 जून 2024 को ₹1,00,000, 30 जून 2024 को ₹60,000 नकद, 5 जुलाई 2024 को ₹15,000 नकद और 7 अगस्त 2024 को ₹3,50,000 शामिल थे।
डॉ. पाण्डेय का आरोप है कि पैसे लेने के बाद प्रशांत शर्मा ने करीब ₹2 लाख का काम ही किया और बाकी काम बीच में ही छोड़कर भाग गए। उनका लिफ्ट का काम अधूरा रह गया, और बार-बार कहने के बावजूद प्रशांत शर्मा न तो काम पूरा कर रहे थे और न ही उनके पैसे वापस कर रहे थे। डॉ. पाण्डेय, जो कि सेवानिवृत्त प्रोफेसर और काफी बुजुर्ग व्यक्ति हैं, ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि पैसा मांगने पर प्रशांत शर्मा उन्हें जान से मारने की धमकी और गाली-गलौज भी करते थे।
इसके बाद, प्रशांत शर्मा ने 3 फरवरी 2025 को ₹3,76,000 का एक चेक डॉ. पाण्डेय को दिया, लेकिन जब डॉ. पाण्डेय ने इसे क्लियरेंस के लिए लगाया तो वह बाउंस हो गया। इसी के बाद डॉ. पाण्डेय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, आरोप लगाया कि प्रशांत शर्मा ने बेईमानी से विश्वास में लेकर उनके पैसे हड़प लिए हैं।
प्रशांत शर्मा के वकील का तर्क – प्रशांत शर्मा की ओर से उनके वकील ने तर्क दिया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वादी ने प्रथम सूचना रिपोर्ट देरी से दर्ज कराई है, और इस देरी का कोई कारण नहीं बताया गया। वकील ने बताया कि प्रशांत शर्मा द्वारा खरीदा गया सामान वादी के पास रखा हुआ है, जिसे लेने जब प्रशांत गए तो वादी ने मना कर दिया। साथ ही, प्रशांत द्वारा दिया गया चेक भी वादी ने बाउंस करवा दिया।
प्रशांत शर्मा के वकील ने न्यायालय को बताया कि उनका मुवक्किल डॉ. पाण्डेय की बकाया राशि ₹3,76,000 लौटाने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि जब चेक बाउंस हो गया था, तो वादी को एन.आई. एक्ट (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) के तहत मुकदमा करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने पुलिस को अपने प्रभाव में लेकर एक ‘फर्जी एफआईआर’ दर्ज कराई है। वकील ने प्रशांत शर्मा को निर्दोष बताते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की।
न्यायालय का फैसला – विद्वान जिला शासकीय अधिवक्ता, फौजदारी ने अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र का कड़ा विरोध किया और इसे निरस्त करने की मांग की। हालांकि, न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को ध्यान से सुना और पत्रावली का अध्ययन किया। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, न्यायालय ने प्रशांत शर्मा का अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र सशर्त स्वीकार कर लिया।
न्यायालय ने प्रशांत शर्मा को निर्देश दिया है कि वे दस दिनों के भीतर संबंधित न्यायालय में उपस्थित हों और ₹50,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो प्रतिभू दाखिल करें। इन शर्तों के आधार पर प्रशांत कुमार शर्मा को अग्रिम जमानत प्रदान की गई है।





