वाराणसी : देश में लगातार हो रहे पेपर लीक, प्रवेश परीक्षाओं में धांधली और शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण के खिलाफ आक्रोश अब राजधानी दिल्ली से लेकर धर्मनगरी काशी तक फैल चुका है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी अनशन के समर्थन में आज वाराणसी के शास्त्री घाट (वरुणापुल) पर साझा संस्कृति मंच द्वारा एक दिवसीय उपवास एवं आंदोलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आंदोलनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल सुधार और समान शिक्षा की मांग करते हुए देश के प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन पत्र नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा।

दिल्ली से बनारस तक गूंजी ‘शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग’ = साषा संस्कृति मंच के बैनर तले वाराणसी के शास्त्री घाट पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित यह एक दिवसीय उपवास केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह देश की रीढ़ यानी शिक्षा व्यवस्था को बचाने और करोड़ों छात्रों के भविष्य की रक्षा का एक मजबूत संकल्प था।

गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक, छात्रनेता नेहा बोरा, मनीष, आमीन व अन्य साथी आमरण अनशन पर बैठे थे। सोनम वांगचुक के 21 दिनों के अनशन के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें जबरन अस्पताल पहुंचाया, लेकिन छात्र नेताओं का संघर्ष अब भी जारी है। दिल्ली के इसी दमन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आज बनारस में भी बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों ने उपवास रखकर एकजुटता दिखाई।

संकट में देश का भविष्य: साझा संस्कृति मंच = आंदोलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज देश की शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षा के अंधाधुंध निजीकरण ने गरीब, ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को हाशिए पर धकेल दिया है। शिक्षा को मौलिक अधिकार के बजाय बाजार की वस्तु बना दिया गया है। साझा संस्कृति मंच ने लोकतांत्रिक आंदोलनकारियों को दिल्ली में बलपूर्वक हटाने की पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दमन से नहीं दबाया जा सकता।

राष्ट्रव्यापी बनता जा रहा है आंदोलन = यह लड़ाई अब सिर्फ दिल्ली या बनारस तक सीमित नहीं रह गई है। कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI), इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) समेत देश के विभिन्न छात्र-युवा संगठन, शिक्षक, नागरिक समूह और सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर देशव्यापी जनमत तैयार कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान और जनसभाएं तेज हो चुकी हैं।

प्रधानमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन की प्रमुख मांगें : उपवास स्थल से नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित 6 प्रमुख मांगें उठाई गईं : NEET पेपर लीक और इसके चलते मानसिक तनाव में आकर दर्जनों अभ्यर्थियों द्वारा किए गए सुसाइड पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें। (शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को तत्काल पूरा किया जाए)। देश में हुए सभी पेपर लीक और परीक्षा घोटालों की सर्वोच्च स्तर पर निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए। पेपर लीक माफिया, भ्रष्ट अधिकारियों और इसमें संलिप्त दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए और शिक्षा के अंधाधुंध निजीकरण व मुनाफाखोरी पर प्रभावी रोक लगाई जाए। देश के हर नागरिक और छात्र को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण, समान और वैज्ञानिक शिक्षा का अधिकार मिले। वैज्ञानिक एवं समाजसेवी सोनम वांगचुक, छात्रनेता नेहा, मनीष और आमीन के अनशन को देखते हुए सरकार तुरंत संवाद की प्रक्रिया शुरू करे और सम्मानजनक समझौते के साथ अनशन समाप्त करवाए।

लगे नारे: ‘शिक्षा बचाओ – भविष्य बचाओ’ = उपवास कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में कई तख्तियां और प्लेकार्ड थे, जिन पर “मोदी सरकार होश में आओ”, “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो“, “छात्रों के सुसाइड पर शर्म करो”, “नई शिक्षा नीति वापस लो”, “शिक्षा बचाओ – भविष्य बचाओ”, “पेपर लीक बंद करो – छात्रों को न्याय दो” और “शिक्षा सबका अधिकार है, व्यापार नहीं” जैसे गगनभेदी नारे लिखे थे।

आज काशी के इस ऐतिहासिक उपवास कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग के प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से नंदलाल मास्टर, रामजनम यादव, फादर आनंद, नीति भाई, डॉ. धनंजय त्रिपाठी, जागृति राही, एडवोकेट अबू हाशिम, एडवोकेट अब्दुल्लाह, ज्योति गुप्ता, डॉ. अनूप श्रमिक, एकता शेखर, अनुराग, फादर दयाकर, सोनी, अरुण माहेश्वरी, अनिता, महेंद्र, अब्दुल्लाह खान, कन्हैया, रूमान, मनोज, बागी प्रमोद, गजराज पटेल, रंजीत राजभर, आदित्य पाल, शिवानी, फादर जीतेश, फादर अनुज, सिस्टर फ्लोरीन, सिस्टर अर्चना, ग्रेस, बेन्सिटा, आर्यमान, इरीना, सानिया अनवर, रवि शेखर, आजाद गौतम, महेंद्र राठौर, सोनू और आशा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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