सोनभद्र से सपा सांसद छोटेलाल खरवार की जाति को लेकर दाखिल अपील मंडलीय अपीलीय फोरम ने खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि सांसद खरवार अनुसूचित जाति के हैं और शिकायत आधारहीन है।

अदालत में सांसद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव और संदीप यादव ने मजबूती से पक्ष रखा।

वाराणसी। सोनभद्र से समाजवादी पार्टी के सांसद छोटेलाल खरवार के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी जाति को लेकर विवादों में घिरे सांसद के खिलाफ दाखिल अपील को मंडलीय अपीलीय फोरम ने “बलहीन और आधारहीन” पाते हुए निरस्त कर दिया है। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि सांसद छोटेलाल खरवार अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के ही हैं।

क्या था पूरा विवाद? – सोनभद्र के अनपरा निवासी इंद्रजीत ने मंडलीय अपीलीय फोरम में एक अपील दाखिल की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि सपा सांसद छोटेलाल खरवार ने लोकसभा चुनाव के नामांकन में गलत हलफनामा दिया है। इंद्रजीत का तर्क था कि खरवार बिरादरी सोनभद्र में अनुसूचित जनजाति (ST) में आती है, इसलिए उन्होंने अनुचित लाभ लेने के लिए खुद को अनुसूचित जाति (SC) बताया। साथ ही, शिकायत में उन्हें कमकर/कहार बिरादरी का होने का भी दावा किया गया था।

अदालत का फैसला और साक्ष्य – मंडलायुक्त एस. राजलिंगम और उनकी टीम (जिसमें चंदौली के ADM और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल थे) ने इस मामले की गहनता से जांच की। अदालत ने पाया कि मूल निवास: तहसील जांच रिपोर्ट (20 नवंबर 2024) के अनुसार, सपा सांसद छोटेलाल खरवार का मूल निवास ग्राम मंगरही, तहसील नौगढ़, जनपद चंदौली है। जाति वर्गीकरण: उत्तर प्रदेश शासन के 2003 के शासनादेश के अनुसार, प्रदेश के 5 जनपदों (देवरिया, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी और सोनभद्र) में खरवार जाति ‘अनुसूचित जनजाति’ में आती है, जबकि बाकी सभी जनपदों (जिसमें चंदौली शामिल है) में यह ‘अनुसूचित जाति’ के रूप में वर्गीकृत है। पुराने दस्तावेज: 1359 फसली वर्ष की खतौनी और परिवार रजिस्टर की नकल (06-11-2024) में भी सांसद की जाति ‘खरवार’ दर्ज पाई गई। उनके पिता स्व. रामधनी और दादा मंश के वंशवृक्ष के आधार पर भी जाति की पुष्टि हुई।

शिकायतकर्ता के पास नहीं थे पुख्ता सबूत – सुनवाई के दौरान अदालत ने नोट किया कि शिकायतकर्ता इंद्रजीत ने सपा सांसद छोटेलाल खरवार को कहार या कमकर बिरादरी का साबित करने के लिए कोई भी तार्किक साक्ष्य या अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया। बार-बार समय दिए जाने के बावजूद कोई ठोस प्रमाण न मिलने पर फोरम ने जिला स्कूटनी कमेटी, चंदौली के पुराने आदेश को सही ठहराया।

अदालत ने कहा: “जिला स्कूटनी कमेटी द्वारा सम्पूर्ण तथ्यों का भलीभांति परीक्षण किया गया है, जिसमें कोई त्रुटि नहीं है। अतः अपीलकर्ता का प्रत्यावेदन बलहीन होने के कारण निरस्त किया जाता है।”

अदालत में सांसद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव और संदीप यादव ने मजबूती से पक्ष रखा। इस फैसले के बाद अब सांसद के निर्वाचन और उनकी जाति को लेकर चल रही कानूनी अड़चनें पूरी तरह समाप्त हो गई हैं।

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