स्ट्रीट लाइट के खराब होने की शिकायत करने पर पिता-पुत्र की जमकर की गयी पिटाई। पार्षद रोहित जायसवाल पर लगा गुंडागर्दी का आरोप। थाना आदमपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

वाराणसी: धर्म की नगरी काशी के हनुमान फाटक इलाके से एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। जहाँ जनता की समस्याओं को सुनने के बजाय, स्ट्रीट लाइट के खराब होने की शिकायत करने पर पिता-पुत्र की जमकर की गयी पिटाई। आरोप स्थानीय पार्षद रोहित जायसवाल और उनके समर्थकों पर लगा है। इस घटना ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, हनुमान फाटक इलाके में गली निर्माण और खराब पड़ी स्ट्रीट लाइट को लेकर पिता-पुत्र ने शिकायत की थी। पीड़ितों का आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर पार्षद ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उन पर हमला बोल दिया। स्ट्रीट लाइट के खराब होने की शिकायत करने पर पिता-पुत्र की जमकर की गयी पिटाई इतनी बेरहमी से की गई कि दोनों लहूलुहान हो गए। वायरल फोटो में देखा जा सकता है कि एक पीड़ित के चेहरे और कान से खून बह रहा है, वहीं दूसरे युवक की आंख में गंभीर चोट आई है।

थाना आदमपुर पर भी लगे गंभीर आरोप पीड़ित परिवार का दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। घायल अवस्था में जब वे न्याय की गुहार लेकर थाना आदमपुर पहुँचे, तो वहाँ का अनुभव और भी डरावना था। पीड़ित का आरोप: थाना आदमपुर पर शिकायत करने के बाद भी पार्षद पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अभद्र व्यवहार: पीड़ितों का कहना है कि पुलिस ने उनकी मदद करने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें वहां से भगा दिया।

सत्ता की हनक और पार्षद की दबंगई क्षेत्रीय सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पार्षद रोहित जायसवाल विधायक नीलकंठ तिवारी के करीबी माने जाते हैं। चर्चा है कि सत्ता के संरक्षण के चलते पार्षद की दबंगई इस कदर बढ़ गई है कि वे क्षेत्र के लोगों के साथ अक्सर मारपीट करते हैं।

“एक जनप्रतिनिधि का काम जनता की सेवा करना होता है, लेकिन यहाँ पार्षद अपनी दबंग छवि बनाए रखने के लिए खून-खराबे पर उतारू हैं।” — स्थानीय नागरिक

पुलिस और प्रशासन से निराश होकर पीड़ितों ने अब वाराणसी पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय मांगने का मन बना लिया है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें न सिर्फ पीटा गया, बल्कि उनके मकान को तुड़वाने और भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई है।

अब देखना यह है कि क्या वाराणसी प्रशासन सत्ता पक्ष के इस कथित ‘दबंग’ पार्षद पर कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पाएगा, या पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहेंगे?

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