वाराणसी: न्याय के मंदिर में एक पुलिसवाले के साथ हुई बदसलूकी और मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वाराणसी कचहरी में कुछ वकील भेषधारियों द्वारा दारोगा की पिटाई के बाद भी जब आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो दारोगा के परिवारवालों का सब्र जवाब दे गया। इंसाफ की आस में गुरुवार को दारोगा के परिजन पुलिस कमिश्नर के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए।

परिजनों का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग का हिस्सा होने के बावजूद उनके अपने के साथ ऐसा बर्ताव हुआ, और तो और, इस गंभीर मामले में भी पुलिस प्रशासन ढिलाई बरत रहा है। उनकी आंखों में गुस्सा और लाचारी, दोनों थी। उन्होंने कमिश्नर से गुहार लगाई कि आरोपियों के खिलाफ तुरंत और कठोर कार्रवाई की जाए।

यह घटना सिर्फ एक दारोगा की पिटाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून व्यवस्था और पुलिस के मनोबल से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन गया है। अगर एक वर्दीधारी ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा? यह सवाल हर किसी के मन में है।

अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या पुलिस कमिश्नर इस मामले में कोई बड़ा कदम उठाएंगे? क्या दारोगा और उसके परिवार को इंसाफ मिलेगा? या यह मामला भी धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा? यह वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने पुलिस और न्याय व्यवस्था के रिश्ते पर एक गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। फ़िलहाल यह सिर्फ एक समाचार मात्र है, जिसका उद्देश्य किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाना नहीं है।

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