वाराणसी के दालमंडी में विकास कार्य से जुड़ी जमीन को लेकर भारी विवाद सामने आया है। पीड़ित मकान मालिक शोएब अहमद ने शाहनवाज उर्फ मीनू पर अवैध कब्जे और धमकी देने का आरोप लगाया है। जानिए पूरा मामला।
वाराणसी के प्रसिद्ध दालमंडी क्षेत्र में विकास कार्यों से जुड़ी जमीन को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है, जिससे पूरे इलाके में हलचल तेज हो गई है। पीड़ित संपत्ति स्वामी शोएब अहमद ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति का एक हिस्सा जनहित में सरकार के नाम रजिस्ट्री किया था। हालांकि, रजिस्ट्री के बाद से ही इस जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

दबंगई और अवैध कब्जे का आरोप = शोएब अहमद का दावा है कि इस जमीन पर पिछले कई वर्षों से शाहनवाज उर्फ मीनू और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा जमाया गया था। सरकार द्वारा जमीन का अधिग्रहण किए जाने के बाद यह विवाद और बढ़ गया। पीड़ित का आरोप है कि शाहनवाज उर्फ मीनू और उसके सहयोगी अब उन पर बाकी बची संपत्ति को भी छोड़ने का दबाव बना रहे हैं। लगातार मिल रही गाली-गलौज, जानमाल की धमकी और मानसिक दबाव के कारण पीड़ित परिवार खौफ में है। शोएब अहमद ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है।
PWD टीम की पैमाइश से मामले में आया नया मोड़ = इस जमीन विवाद में 6 सितंबर 2026 को उस समय एक नया मोड़ आया, जब लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने विवादित जमीन की गहन पैमाइश और सीमांकन की कार्रवाई की। पीड़ित भवन स्वामी के अनुसार, PWD की टीम ने सरकारी जमीन की पहचान कर मौके पर बाउंड्री मार्क लगाए और सीमांकन के लिए पत्थर भी गाड़े। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से दालमंडी इलाके के इस विवादित स्थल पर राजनीतिक और सामाजिक हलचल काफी बढ़ गई है।
जर्जर दीवार और कानूनी स्थिति = मामले की पृष्ठभूमि में दालमंडी चौड़ीकरण अभियान के दौरान ध्वस्त हुए भूभाग का एक जर्जर हिस्सा भी शामिल है। शोएब अहमद के मुताबिक, इस खतरनाक स्थिति को लेकर पहले भी पुलिस-प्रशासन के समक्ष चिंता जताई गई थी। जांच रिपोर्ट (01/08/2026): कार्यपालक मजिस्ट्रेट/अपर पुलिस उपायुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के समक्ष प्रस्तुत जांच आख्या पर सुनवाई करते हुए वाद को निरस्त कर दिया गया था और थाना चौक पुलिस को मौके पर सतर्क दृष्टि रखने का निर्देश दिया गया था। थाना चौक की आख्या: पुलिस रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मौके पर केवल 5 इंच की एक जर्जर दीवार खड़ी थी, जिसके गिरने से किसी बड़े हादसे या जनहानि की आशंका बनी हुई थी। किसी अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से इस दीवार को हटाने का आदेश भी जारी किया गया था। भवन स्वामी का कहना है कि वह दीवार प्राकृतिक कारणों से गिरी या किसी साजिश के तहत गिराई गई, यह जांच का विषय है। लेकिन इस घटना के बाद भी विपक्षी पक्ष द्वारा उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने और जान से मारने की लगातार धमकियां दी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग = लगातार बढ़ते दबाव और विवाद को देखते हुए पीड़ित शोएब अहमद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ संबंधित थाना चौक में विपक्षी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। प्रार्थना पत्र में पीड़ित ने प्रशासन से : पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने, अपनी जानमाल और बची हुई संपत्ति की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने, दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
विपक्षी का आपराधिक इतिहास और बेदखली का वाद = पीड़ित भवन स्वामी और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आरोपी शाहनवाज उर्फ मीनू एक दबंग किस्म का व्यक्ति है, जिसके तार आपराधिक तत्वों से जुड़े बताए जाते हैं। उसके खिलाफ थाना चौक में पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त, उक्त विपक्षी के बेदखली से संबंधित एक वाद न्यायालय अपर जिला मजिस्ट्रेट (नगर) के समक्ष विचारधीन है। इसके बावजूद, विपक्षी द्वारा कोर्ट के आदेशों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर मौके पर दबंगई दिखाने और अवैध कब्जे का भरसक प्रयास किया जा रहा है।
बीएम ब्रेकिंग न्यूज की नजर = वाराणसी दालमंडी के इस बहुचर्चित जमीन विवाद में अब मुख्य सवाल यह है कि थाना चौक पुलिस निष्पक्षता से जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी करती है, या फिर पीड़ित भवन स्वामी को ही किसी राजनीतिक या असामाजिक प्रभाव में आकर विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल बीएम ब्रेकिंग न्यूज की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और आगे की हर अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।


