वाराणसी दुष्कर्म मामला में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी मोहित कुमार उर्फ पतालु को बड़ी राहत देते हुए जमानत मंजूर की। युवती को मेला दिखाने के बहाने भगाकर दुष्कर्म करने का है आरोप।

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव एवं संदीप यादव ने पक्ष रखा।

वाराणसी। चर्चित वाराणसी दुष्कर्म मामला में आरोपी को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। युवती को मेला दिखाने के बहाने बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार मोहित कुमार उर्फ पतालु को फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) से जमानत मिल गई।

फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) कुलदीप सिंह की अदालत ने दशनीपुर, चोलापुर निवासी आरोपी मोहित कुमार उर्फ पतालु को एक-एक लाख रुपये की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। इस वाराणसी दुष्कर्म मामला की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव एवं संदीप यादव ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, चोलापुर थाना क्षेत्र निवासी वादिनी साधना देवी ने चोलापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पुत्री 25 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब 2 बजे घर से कहीं चली गई थी। काफी खोजबीन के बाद जानकारी मिली कि गांव का ही युवक मोहित कुमार उनकी पुत्री को अपने साथ भगा ले गया है।

पीड़िता ने मोबाइल फोन से अपनी मां को बताया था कि मोहित कुमार उसे मेला घुमाने के बहाने घर से लेकर गया था। जब परिजन आरोपी के घर पहुंचे तो वह घर पर मौजूद नहीं मिला। बाद में जब मोहित कुमार के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो उसका फोन स्विच ऑफ आया। परिजनों का आरोप था कि आरोपी के घरवालों को भी इस वाराणसी दुष्कर्म मामला की जानकारी थी और उनकी भूमिका संदिग्ध है।

इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर 7 जनवरी 2026 को उसे गिरफ्तार किया और पीड़िता को बरामद किया। इसके बाद पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में आरोप लगाया कि मोहित कुमार उसे जबरन भगा ले गया था और आगरा ले जाकर उसके साथ तीन बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया और वाराणसी दुष्कर्म मामला चर्चा में आ गया। हालांकि, जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को सशर्त जमानत दे दी।

फिलहाल आरोपी जमानत पर रिहा हो गया है, लेकिन वाराणसी दुष्कर्म मामला की सुनवाई जारी रहेगी। अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

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