अदालत में वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, अभिषेक श्रीवास्तव पंकज, नरेश यादव और संदीप यादव ने जमानत का विरोध किया।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में रिश्तों और पड़ोस की मर्यादा को तार-तार करने वाले एक जघन्य मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोपित मल्लू यादव उर्फ विनोद यादव को कानून से कोई राहत नहीं मिली है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अजय कुमार की अदालत ने अपराध की गंभीरता और पीड़िता के साथ हुए मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न को देखते हुए आरोपित की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया।
चाकलेट का लालच देकर की थी दरिंदगी – यह शर्मनाक घटना 7 जनवरी 2026 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, चितईपुर (BLW) निवासी मल्लू यादव उर्फ विनोद यादव ने पड़ोस में रहने वाली 13 वर्षीय मासूम बच्ची को उस समय निशाना बनाया जब वह घर पर अकेली थी। आरोपित ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने के लिए उसे चाकलेट देने का लालच देकर अपने घर बुलाया। वहां उसके साथ बलपूर्वक गलत काम किया और पूरी घटना का वीडियो बना लिया।
वीडियो वायरल कर दी जान से मारने की धमकी – आरोपित की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। उसने पीड़िता को धमकाया कि यदि उसने किसी को कुछ बताया, तो वह वीडियो वायरल कर देगा और उसकी हत्या कर देगा। डर के मारे मासूम खामोश रही, लेकिन 14 जनवरी 2026 को जब वह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब पीड़िता के भाई को इस खौफनाक हकीकत का पता चला। घर वालों के पूछने पर पीड़िता फूट-फूट कर रोने लगी और पूरी आपबीती सुनाई।
अदालत में जमानत अर्जी का कड़ा विरोध – सुनवाई के दौरान अदालत में वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, अभिषेक श्रीवास्तव पंकज, नरेश यादव और संदीप यादव ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। वकीलों ने तर्क दिया कि नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और वीडियो वायरल करने के आरोपित को समाज में खुला छोड़ना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा।
“ऐसे घृणित कृत्य समाज के लिए कलंक हैं। मासूम की गरिमा और उसकी सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।” — वादी पक्ष के अधिवक्ता
इस मामले में वाराणसी के दशाश्वमेध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद आरोपित मल्लू यादव को जेल भेज दिया था। कोर्ट ने माना कि आरोपित के खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं, जिससे पीड़िता का भविष्य और सम्मान प्रभावित हुआ है।





