वाराणसी के अम्बेडकर पार्क में साझा संस्कृति मंच ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई के विरोध में एक दिवसीय मौन उपवास और धरना दिया। अंतरराष्ट्रीय शांति और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर जताई चिंता।

वाराणसी। वैश्विक शांति और मानवाधिकारों की रक्षा के आह्वान के साथ आज वाराणसी की धरती से युद्ध के खिलाफ आवाज बुलंद की गई। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई के विरोध में साझा संस्कृति मंच, वाराणसी के बैनर तले कचहरी स्थित अम्बेडकर पार्क में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक एक दिवसीय ‘मौन उपवास’ और धरना आयोजित किया गया।

ईरान पर हमले को बताया मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन धरना प्रदर्शन के दौरान साझा संस्कृति मंच ने एक कड़ा वक्तव्य जारी किया। मंच का कहना है कि एक तरफ ओमान की मध्यस्थता में शांति वार्ता चल रही थी, वहीं दूसरी ओर बिना किसी युद्ध की घोषणा के ईरान पर एकतरफा सैन्य कार्रवाई की गई। वक्तव्य में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर चिंता जताई गई ईरान के राष्ट्रीय एवं धार्मिक नेता की हत्या। स्कूल और अस्पताल पर हुए हमले में 150 से अधिक मासूम बच्चियों की मौत। अमेरिका और इज़राइल की इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को पैदा हुआ खतरा।

अमेरिकी ‘अधिनायकवाद’ और भारत पर दबाव की निंदा साझा संस्कृति मंच ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि वेनेज़ुएला के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप और अमेरिका की अन्य विस्तारवादी नीतियों की भी आलोचना की। मंच ने कहा कि ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात करना या कनाडा को अमेरिका का “51वाँ राज्य” बनाने जैसी धमकियाँ डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की अलोकतांत्रिक नीतियों को दर्शाती हैं।

भारतीय संदर्भ में मंच ने कहा कि:

“रूस से तेल आयात रोकने का दबाव और व्यापारिक समझौतों में टैरिफ की धमकियाँ भारत की आर्थिक संप्रभुता पर हमला हैं। भारत सरकार का ऐसे दबावों के सामने कमजोर रुख देश की स्वतंत्र विदेश नीति के लिए हानिकारक है।”

धरने पर बैठे वक्ताओं ने याद दिलाया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति और न्यायपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने का निर्देश देता है। महात्मा गांधी और पंडित नेहरू के नेतृत्व में भारत हमेशा साम्राज्यवाद के खिलाफ खड़ा रहा है। वाराणसी के प्रबुद्ध नागरिकों ने अपील की कि रमज़ान के इस पवित्र महीने में दुनिया में खून-खराबा बंद होना चाहिए और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख व्यक्तित्व इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शहर के विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य रूप से फादर आनंद, जागृति राही, रामधीरज, हाजी इश्तियाक, सतीश सिंह, कांग्रेस नेता महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, जिलाध्यक्ष राजेश्वर पटेल, जिला महिला अध्यक्ष अनुराधा यादव, डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी, डॉ. धनंजय त्रिपाठी, रवि शेखर, एकता शेखर, एडवोकेट लोकेश कुमार सिंह और अन्य गणमान्य नागरिक।

वाराणसी में आयोजित यह मौन उपवास इस बात का प्रतीक है कि युद्ध चाहे कहीं भी हो, उसका दर्द मानवता महसूस करती है। साझा संस्कृति मंच ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अमेरिका और इज़राइल को तत्काल युद्ध रोककर कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।

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