वाराणसी: धर्म और आस्था की नगरी काशी में गंगा नदी इन दिनों अपने उफान पर है। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इस समय यह 66.6 मीटर पर बह रही है। नदी के बढ़ते जलस्तर से काशी के सभी 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट चुका है, जिससे शहर की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। घाटों के किनारे बने कई प्राचीन मंदिर पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं।

प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी तरह की नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, सुरक्षा के मद्देनजर श्रद्धालुओं को गहरे पानी में स्नान करने से भी मना किया गया है। सावन के पवित्र महीने में जहां घाटों पर लाखों की भीड़ होती थी, वहीं गंगा के रौद्र रूप के कारण अब घाट सिकुड़ गए हैं और चहल-पहल कम हो गई है।

सैकड़ों परिवारों के सामने आर्थिक संकट

गंगा का यह उफान सिर्फ घाटों को ही नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका को भी डुबो रहा है। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को है, जिनकी रोजी-रोटी सीधे तौर पर घाटों से जुड़ी हुई है। सावन में दिन-रात पूजा-पाठ कर कमाई करने वाले पुरोहितों का काम ठप हो गया है, जबकि नाविकों को अपनी नावों को किनारे लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

एक पुरोहित ने बताया कि गंगा का जलस्तर इतना तेजी से बढ़ा है कि उन्हें 17 दिन में 10 बार अपनी जगह बदलनी पड़ी है। उन्होंने कहा, “लगभग सभी आरती स्थल पानी में डूब गए हैं। हालांकि कुछ श्रद्धालु और कांवड़िए आ रहे हैं, लेकिन हमारी आमदनी बहुत कम हो गई है। अगर पानी और बढ़ा तो परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।”

वहीं, एक नाविक ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि नाव से गंगा भ्रमण पूरी तरह से बंद है। उन्होंने बताया, “लगभग हर साल यही स्थिति होती है और हमें करीब 3 महीने तक घर पर ही रहना पड़ता है। इस समय बस यही चिंता रहती है कि किसी तरह अपनी नावों को सुरक्षित रख सकें।”

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